रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीणों का 7 दिन का अल्टीमेटम, मांगें पूरी नहीं हुईं तो धरना-प्रदर्शन और हड़ताल क रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीणों का 7 दिन का अल्टीमेटम, मांगें पूरी नहीं हुईं तो धरना-प्रदर्शन और हड़ताल की चेतावनी
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रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीणों का 7 दिन का अल्टीमेटम, मांगें पूरी नहीं हुईं तो धरना-प्रदर्शन और हड़ताल क रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीणों का 7 दिन का अल्टीमेटम, मांगें पूरी नहीं हुईं तो धरना-प्रदर्शन और हड़ताल की चेतावनी
रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीणों का 7 दिन का अल्टीमेटम, मांगें पूरी नहीं हुईं तो धरना-प्रदर्शन और हड़ताल क
रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीणों का 7 दिन का अल्टीमेटम, मांगें पूरी नहीं हुईं तो धरना-प्रदर्शन और हड़ताल की चेतावनी
संवादाता अखिलेश त्रिपाठी
खाड़ा पंचायत के ग्रामीणों ने एसईसीएल प्रबंधन को सौंपा मांग पत्र, स्थानीय रोजगार, प्रदूषण नियंत्रण, सड़क-बिजली और पुनर्वास के मुद्दे उठाए; कांग्रेस नेता रमेश सिंह सहित कई लोग रहे उपस्थित
अनूपपुर/शहडोल। रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में कोयला उत्खनन कार्य से प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक को मांग पत्र सौंपा है। खाड़ा ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने प्रबंधन को सात दिनों का समय देते हुए समस्याओं के निराकरण की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा में मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन और हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे।
26 अक्टूबर 2026 को सौंपे गए मांग पत्र में ग्रामीणों ने कहा कि रामपुर बटुरा उपक्षेत्र में पिछले तीन-चार वर्षों से कोयला उत्खनन का कार्य संचालित है। परियोजना के कारण आसपास के गांव प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
इस दौरान कांग्रेस नेता रमेश सिंह, पूर्व जनपद सदस्य राजबहोर चंद्रा, सामाजिक कार्यकर्ता अखिलेश त्रिपाठी, संदीप द्विवेदी सहित कई लोग उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने एकजुट होकर क्षेत्र की समस्याओं के समाधान और प्रभावित परिवारों को उनका अधिकार दिलाने की मांग उठाई।
स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग
ग्रामीणों ने रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में ओवरबर्डन हटाने का कार्य कर रही जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। मांग पत्र में आरोप लगाया गया है कि स्थानीय युवाओं को पर्याप्त अवसर दिए बिना बाहरी लोगों की भर्ती की जा रही है।
ग्रामीणों ने ओवरबर्डन कार्य में स्थानीय लोगों की भागीदारी 70 प्रतिशत तक सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि खदान से प्रभावित क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलना चाहिए, ताकि स्थानीय परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके और बेरोजगारी की समस्या का समाधान हो।
धूल और प्रदूषण से राहत दिलाने की मांग
खाड़ा पंचायत के ग्रामीणों ने खदान क्षेत्र में भारी वाहनों और ट्रेलरों की आवाजाही से धूल एवं वायु प्रदूषण की समस्या उठाई। ग्रामीणों के अनुसार, नियमित पानी का छिड़काव नहीं होने से आसपास के लोगों को परेशानी होती है।
उन्होंने खदान और परिवहन मार्गों पर नियमित पानी का छिड़काव कराने तथा प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय लागू करने की मांग की है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
रामपुर से सांधा तक स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग
ग्रामीणों ने रामपुर से खाड़ा होते हुए सांधा तक सड़क पर स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि पूर्व की बैठकों में भी इस व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन अब तक सड़क पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों ने कहा कि रात के समय अंधेरे के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इसलिए संबंधित प्रबंधन को इस दिशा में जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।
भू-अधिग्रहण, पुनर्वास और प्रभावित किसानों को रोजगार
मांग पत्र में भू-अधिग्रहण एवं पुनर्वास की लंबित प्रक्रिया को गति देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित किसानों के मामलों का समय पर निराकरण नहीं होने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित करने, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को उपस्थित रखने, अधिग्रहण संबंधी दस्तावेजी कार्रवाई पूरी करने तथा पात्र किसानों को नियमानुसार रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने की मांग की है।
वैकल्पिक सड़क और मुरुम भराई का मामला
ग्रामीणों ने अनूपपुर-जैतपुर मुख्य मार्ग से गिद्दा टोला, कंटियान टोला और खोलगढ़ी की ओर जाने वाली वैकल्पिक सड़क का निर्माण कराने की मांग की है। इससे संबंधित गांवों के लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सकेगी।
इसके अलावा रामपुर खदान से सांधा के बीच सड़क किनारे मुरुम भराई का काम भी जल्द पूरा कराने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के बाद लंबित कार्य को पूरा करना आवश्यक है, ताकि सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका कम हो।
लिफ्ट इरिगेशन परियोजना पूरी कराने की मांग
ग्रामीणों ने लंबे समय से लंबित लिफ्ट इरिगेशन परियोजना को भी जल्द पूरा कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि परियोजना के शुरू होने से खेती-किसानी को लाभ मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
उन्होंने एसईसीएल प्रबंधन से इस परियोजना को प्राथमिकता देने और कार्य को शीघ्र पूरा कराने की मांग की है, ताकि क्षेत्र के अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।
सात दिन में समाधान नहीं तो आंदोलन
ग्रामीणों ने मांग पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया है कि उनकी मांगें क्षेत्र के विकास, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा और प्रभावित परिवारों के हितों से जुड़ी हैं। उन्होंने प्रबंधन से सात दिनों के भीतर समस्याओं पर ठोस कार्रवाई करने की अपेक्षा जताई है।
मांग पत्र की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, अनुविभागीय दंडाधिकारी तथा थाना प्रभारी कोतवाली अनूपपुर को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो वे धरना-प्रदर्शन और हड़ताल जैसे लोकतांत्रिक कदम उठाएंगे। अब निगाहें एसईसीएल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों पर हैं कि वे ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या पहल करते हैं।
रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीणों का 7 दिन का अल्टीमेटम, मांगें पूरी नहीं हुईं तो धरना-प्रदर्शन और हड़ताल की चेतावनी
संवादाता अखिलेश त्रिपाठी
खाड़ा पंचायत के ग्रामीणों ने एसईसीएल प्रबंधन को सौंपा मांग पत्र, स्थानीय रोजगार, प्रदूषण नियंत्रण, सड़क-बिजली और पुनर्वास के मुद्दे उठाए; कांग्रेस नेता रमेश सिंह सहित कई लोग रहे उपस्थित
अनूपपुर/शहडोल। रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में कोयला उत्खनन कार्य से प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक को मांग पत्र सौंपा है। खाड़ा ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने प्रबंधन को सात दिनों का समय देते हुए समस्याओं के निराकरण की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा में मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन और हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे।
26 अक्टूबर 2026 को सौंपे गए मांग पत्र में ग्रामीणों ने कहा कि रामपुर बटुरा उपक्षेत्र में पिछले तीन-चार वर्षों से कोयला उत्खनन का कार्य संचालित है। परियोजना के कारण आसपास के गांव प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
इस दौरान कांग्रेस नेता रमेश सिंह, पूर्व जनपद सदस्य राजबहोर चंद्रा, सामाजिक कार्यकर्ता अखिलेश त्रिपाठी, संदीप द्विवेदी सहित कई लोग उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने एकजुट होकर क्षेत्र की समस्याओं के समाधान और प्रभावित परिवारों को उनका अधिकार दिलाने की मांग उठाई।
स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग
ग्रामीणों ने रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में ओवरबर्डन हटाने का कार्य कर रही जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। मांग पत्र में आरोप लगाया गया है कि स्थानीय युवाओं को पर्याप्त अवसर दिए बिना बाहरी लोगों की भर्ती की जा रही है।
ग्रामीणों ने ओवरबर्डन कार्य में स्थानीय लोगों की भागीदारी 70 प्रतिशत तक सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि खदान से प्रभावित क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलना चाहिए, ताकि स्थानीय परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके और बेरोजगारी की समस्या का समाधान हो।
धूल और प्रदूषण से राहत दिलाने की मांग
खाड़ा पंचायत के ग्रामीणों ने खदान क्षेत्र में भारी वाहनों और ट्रेलरों की आवाजाही से धूल एवं वायु प्रदूषण की समस्या उठाई। ग्रामीणों के अनुसार, नियमित पानी का छिड़काव नहीं होने से आसपास के लोगों को परेशानी होती है।
उन्होंने खदान और परिवहन मार्गों पर नियमित पानी का छिड़काव कराने तथा प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय लागू करने की मांग की है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
रामपुर से सांधा तक स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग
ग्रामीणों ने रामपुर से खाड़ा होते हुए सांधा तक सड़क पर स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि पूर्व की बैठकों में भी इस व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन अब तक सड़क पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों ने कहा कि रात के समय अंधेरे के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इसलिए संबंधित प्रबंधन को इस दिशा में जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।
भू-अधिग्रहण, पुनर्वास और प्रभावित किसानों को रोजगार
मांग पत्र में भू-अधिग्रहण एवं पुनर्वास की लंबित प्रक्रिया को गति देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित किसानों के मामलों का समय पर निराकरण नहीं होने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित करने, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को उपस्थित रखने, अधिग्रहण संबंधी दस्तावेजी कार्रवाई पूरी करने तथा पात्र किसानों को नियमानुसार रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने की मांग की है।
वैकल्पिक सड़क और मुरुम भराई का मामला
ग्रामीणों ने अनूपपुर-जैतपुर मुख्य मार्ग से गिद्दा टोला, कंटियान टोला और खोलगढ़ी की ओर जाने वाली वैकल्पिक सड़क का निर्माण कराने की मांग की है। इससे संबंधित गांवों के लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सकेगी।
इसके अलावा रामपुर खदान से सांधा के बीच सड़क किनारे मुरुम भराई का काम भी जल्द पूरा कराने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के बाद लंबित कार्य को पूरा करना आवश्यक है, ताकि सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका कम हो।
लिफ्ट इरिगेशन परियोजना पूरी कराने की मांग
ग्रामीणों ने लंबे समय से लंबित लिफ्ट इरिगेशन परियोजना को भी जल्द पूरा कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि परियोजना के शुरू होने से खेती-किसानी को लाभ मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
उन्होंने एसईसीएल प्रबंधन से इस परियोजना को प्राथमिकता देने और कार्य को शीघ्र पूरा कराने की मांग की है, ताकि क्षेत्र के अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।
सात दिन में समाधान नहीं तो आंदोलन
ग्रामीणों ने मांग पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया है कि उनकी मांगें क्षेत्र के विकास, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा और प्रभावित परिवारों के हितों से जुड़ी हैं। उन्होंने प्रबंधन से सात दिनों के भीतर समस्याओं पर ठोस कार्रवाई करने की अपेक्षा जताई है।
मांग पत्र की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, अनुविभागीय दंडाधिकारी तथा थाना प्रभारी कोतवाली अनूपपुर को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो वे धरना-प्रदर्शन और हड़ताल जैसे लोकतांत्रिक कदम उठाएंगे। अब निगाहें एसईसीएल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों पर हैं कि वे ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या पहल करते हैं।