राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आचार संहिता लगने पर उठाए सवाल
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आचार संहिता, डेमोक्रेसी, संविधान ये सारी चीजें भाजपा के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं। हम संविधान की बात कर रहे हैं। संविधान में लिखा है कि पांच साल में चुनाव करवाने हैं। कोर्ट में भी हम ही गए, हमने ही कोर्ट के अंदर लड़ाई लड़ी कांग्रेस ने, कांग्रेस के लोगों ने। और कोर्ट ने भी इनको दो-दो बार फटकार लगाई, तब जाकर ये चुनाव पर एग्री हुए हैं।
रही बात आचार संहिता की चलते चुनाव के अंदर भारतीय जनता पार्टी अपने उम्मीदवार को मंत्री की शपथ दिला दे, तो फिर आचार संहिता कहां रह गई? ये तो नगर निकाय और पंचायती राज के चुनाव हैं। MLA के चुनाव के अंदर, उपचुनाव के अंदर, इन्होंने टीटी साहब को चलते चुनाव में, प्रत्याशी को मंत्री की शपथ दिला दी थी। और एक ऐसा मंत्री बना दिया, जो ज्वाइन ही नहीं कर पाएं और उनकी विदाई उससे पहले ही तय हो गई। क्या कर सकते हैं, आप समझ सकते हैं।
विधानसभा चलना और आचार संहिता में वैसे कोई दिक्कत नहीं है। घोषणाएं नहीं कर सकते और वैसे भी घोषणाएं जो कर दीं, वे कौन-सी पूरी हो गई हैं? इन्होंने तो पहले ही घोषणाएं खूब कर रखी हैं। वो ही कर दे, मुख्यमंत्री जी रोज दो बसों को झंडी दिखा देते हैं। वे भी पहले बजट की घोषणाएं हैं। 500 बसें करेंगे, दूसरे में कह रहे हैं 1,000 करेंगे। अभी तक तो आई नहीं। कल भी जो कर रहे थे, उनकी नंबर प्लेट भी नहीं लगी हुई थी। बिना नंबर प्लेट की बसों को यानी मुख्यमंत्री जी बिना नंबर प्लेट की बसों को झंडी दिखाकर रवाना कर रहे हैं। यानी खुद के नियम खुद ही तोड़ रहे हैं।
विधानसभा की गरिमा होती है। जो मंत्रियों ने आश्वासन दिए हैं, वे भी यूं के यूं ही पड़े हुए हैं। वेबसाइट से उन्हें हटा दिया गया। आश्वासन, जो कि वेबसाइट पर रहते हैं, वे भी हटा दिए गए, जिसे कोई भी चेक कर सकता है। जो मंत्रियों ने आश्वासन दिए, वे वेबसाइट से हटा दिए। ऐसे लोग हैं ये तो उनके लिए आचार संहिता कोई मायने नहीं रखती है।
रही बात आचार संहिता की चलते चुनाव के अंदर भारतीय जनता पार्टी अपने उम्मीदवार को मंत्री की शपथ दिला दे, तो फिर आचार संहिता कहां रह गई? ये तो नगर निकाय और पंचायती राज के चुनाव हैं। MLA के चुनाव के अंदर, उपचुनाव के अंदर, इन्होंने टीटी साहब को चलते चुनाव में, प्रत्याशी को मंत्री की शपथ दिला दी थी। और एक ऐसा मंत्री बना दिया, जो ज्वाइन ही नहीं कर पाएं और उनकी विदाई उससे पहले ही तय हो गई। क्या कर सकते हैं, आप समझ सकते हैं।
विधानसभा चलना और आचार संहिता में वैसे कोई दिक्कत नहीं है। घोषणाएं नहीं कर सकते और वैसे भी घोषणाएं जो कर दीं, वे कौन-सी पूरी हो गई हैं? इन्होंने तो पहले ही घोषणाएं खूब कर रखी हैं। वो ही कर दे, मुख्यमंत्री जी रोज दो बसों को झंडी दिखा देते हैं। वे भी पहले बजट की घोषणाएं हैं। 500 बसें करेंगे, दूसरे में कह रहे हैं 1,000 करेंगे। अभी तक तो आई नहीं। कल भी जो कर रहे थे, उनकी नंबर प्लेट भी नहीं लगी हुई थी। बिना नंबर प्लेट की बसों को यानी मुख्यमंत्री जी बिना नंबर प्लेट की बसों को झंडी दिखाकर रवाना कर रहे हैं। यानी खुद के नियम खुद ही तोड़ रहे हैं।
विधानसभा की गरिमा होती है। जो मंत्रियों ने आश्वासन दिए हैं, वे भी यूं के यूं ही पड़े हुए हैं। वेबसाइट से उन्हें हटा दिया गया। आश्वासन, जो कि वेबसाइट पर रहते हैं, वे भी हटा दिए गए, जिसे कोई भी चेक कर सकता है। जो मंत्रियों ने आश्वासन दिए, वे वेबसाइट से हटा दिए। ऐसे लोग हैं ये तो उनके लिए आचार संहिता कोई मायने नहीं रखती है।