📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Unknown authorUnknown author
देश
पंजाब के सीमांत किसान घरेलू बागीची मॉडल से गेहूं‑चावल से आगे बढ़ रहे
✍️ The Indian Express
🗓 21 सित. 2026, 01:35 AM
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पंजाब के सीमांत किसान घरेलू बागीची मॉडल का उपयोग करके सब्ज़ियाँ, फलों और अन्य फसलों की खेती कर रहे हैं, जिससे वे गेहूं‑चावल पर निर्भरता कम कर रहे हैं और आजीविका में सुधार ला रहे हैं.
घरेलू बागीची मॉडल का अर्थ एक छोटा पैमाने पर घर के बगीचे जैसा सेटअप है, जिससे सीमित भूमि पर विविध फसलें उगाई जा सकती हैं। पंजाब के सीमांत किसान इस मॉडल को अपनाकर पारंपरिक गेहूं‑चावल चक्र से आगे बढ़ रहे हैं।
सब्ज़ियाँ, फलों, दलहन और अन्य अल्पकालिक फसलों की खेती करके ये किसान परिवार के पोषण को बेहतर बनाना और पूरे वर्ष अतिरिक्त आय अर्जित करना चाहते हैं। इस मॉडल से उपलब्ध संसाधनों जैसे परिवारिक श्रम और पानी का बेहतर उपयोग भी होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पानी‑गहन स्टेपल्स से विविधता लाने से इनपुट लागत कम हो सकती है और अधिक टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिल सकता है। यह बदलाव पंजाब के छोटे धारक समुदाय के बीच बाजार और जलवायु अनिश्चितताओं के प्रति लचीलापन बढ़ाने के व्यापक प्रयास को दर्शाता है।
सब्ज़ियाँ, फलों, दलहन और अन्य अल्पकालिक फसलों की खेती करके ये किसान परिवार के पोषण को बेहतर बनाना और पूरे वर्ष अतिरिक्त आय अर्जित करना चाहते हैं। इस मॉडल से उपलब्ध संसाधनों जैसे परिवारिक श्रम और पानी का बेहतर उपयोग भी होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पानी‑गहन स्टेपल्स से विविधता लाने से इनपुट लागत कम हो सकती है और अधिक टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिल सकता है। यह बदलाव पंजाब के छोटे धारक समुदाय के बीच बाजार और जलवायु अनिश्चितताओं के प्रति लचीलापन बढ़ाने के व्यापक प्रयास को दर्शाता है।