📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
पीएम की ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान पर सत्यापन, भास्कर ने गुजरात के गिनीज़ साइटों का दौरा किया
✍️ Bhaskar English
🗓 24 सित. 2026, 10:32 AM
👁 13
दैनिक भास्कर ने गुजरात के गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड वाले पेड़‑रोपण स्थलों का दौरा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान की प्रगति का मूल्यांकन किया, जिससे इसकी वास्तविक प्रभावशीलता पर सवाल उठे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान, जो देश भर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करता है, दैनिक भास्कर के पत्रकारों द्वारा गुजरात के कई गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थलां का दौरा करने के बाद जांच के दायरे में आया है। रिपोर्टरों ने इन स्थानों पर वृक्षारोपण की वास्तविक स्थिति को रिकॉर्ड में दर्ज मानकों से मिलान करने की कोशिश की।
दौरे के दौरान टीम ने वृक्षारोपण की मात्रा और समुदाय की भागीदारी को देखा, और पाया कि अभियान के लक्ष्य और जमीन पर कार्यान्वयन के बीच अंतर मौजूद है। इस अंतर ने अभियान की प्रगति पर पारदर्शी मूल्यांकन की आवश्यकता को उजागर किया है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधिकारियों ने अभी तक भास्कर की रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस बीच, सरकार स्कूलों, गांवों और शहरी क्षेत्रों में वृक्षारोपण अभियानों को जारी रखी है और नागरिकों से देश की हरित आवरण बढ़ाने का आह्वान किया है।
भास्कर की कवरेज इस बात पर प्रकाश डालती है कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को वास्तविक पर्यावरणीय लाभ में बदलने के लिए व्यवस्थित निगरानी और सटीक डेटा की आवश्यकता है, खासकर जब भारत अपने जलवायु लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।
दौरे के दौरान टीम ने वृक्षारोपण की मात्रा और समुदाय की भागीदारी को देखा, और पाया कि अभियान के लक्ष्य और जमीन पर कार्यान्वयन के बीच अंतर मौजूद है। इस अंतर ने अभियान की प्रगति पर पारदर्शी मूल्यांकन की आवश्यकता को उजागर किया है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधिकारियों ने अभी तक भास्कर की रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस बीच, सरकार स्कूलों, गांवों और शहरी क्षेत्रों में वृक्षारोपण अभियानों को जारी रखी है और नागरिकों से देश की हरित आवरण बढ़ाने का आह्वान किया है।
भास्कर की कवरेज इस बात पर प्रकाश डालती है कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को वास्तविक पर्यावरणीय लाभ में बदलने के लिए व्यवस्थित निगरानी और सटीक डेटा की आवश्यकता है, खासकर जब भारत अपने जलवायु लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।