📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Department of the Treasury. Office of the Second A
बिज़नेस
पेमेंट एग्रीगेटर्स ने यूपीआई एमडीआर का स्थिर व प्रत्यक्ष हिस्सा माँगा
✍️ Business Standard
🗓 28 अग. 2026, 03:33 PM
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पेमेंट एग्रीगेटर्स यूपीआई एमडीआर के स्थिर व प्रत्यक्ष हिस्से की मांग कर रहे हैं, जिससे शुल्क वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी।
भारत के पेमेंट एग्रीगेटर्स ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) लेन‑देन पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का स्थिर व प्रत्यक्ष हिस्सा तय करने की माँग की है। वे कहते हैं कि पूर्वनिर्धारित हिस्सेदारी से उन व्यवसायों को स्पष्टता मिलेगी जो एग्रीगेटर्स पर भुगतान प्रक्रिया के लिए निर्भर हैं। वर्तमान व्यवस्था में अक्सर अप्रत्यक्ष या परिवर्तनीय आवंटन होने के कारण पारदर्शिता की कमी और योजना बनाना कठिन हो जाता है। यह मांग नियामकों और UPI मूल्य निर्धारण ढाँचे को निर्धारित करने वाले निकायों को संबोधित की गई है, ताकि एक स्पष्ट ढाँचा स्थापित किया जा सके।
यह प्रस्ताव तब आया है जब UPI डिजिटल भुगतान में भारत का प्रमुख साधन बन चुका है, जो हर महीने अरबों लेन‑देन संभालता है। एग्रीगेटर्स, जो व्यापारियों और बैंकों के बीच मध्यस्थता करते हैं, व्यापारियों को ऑनबोर्ड करने और लेन‑देन को सुगम बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। MDR का प्रत्यक्ष हिस्सा प्राप्त करके वे अपनी आय को प्रदान की गई सेवाओं के साथ अधिक सुसंगत बनाना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि MDR साझाकरण मॉडल में कोई भी बदलाव NPCI के साथ समन्वय और मौजूदा दिशानिर्देशों में संशोधन की आवश्यकता होगी। एग्रीगेटर्स ने नीति निर्माताओं के साथ संवाद स्थापित करने और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने की तत्परता जताई है।
यह प्रस्ताव तब आया है जब UPI डिजिटल भुगतान में भारत का प्रमुख साधन बन चुका है, जो हर महीने अरबों लेन‑देन संभालता है। एग्रीगेटर्स, जो व्यापारियों और बैंकों के बीच मध्यस्थता करते हैं, व्यापारियों को ऑनबोर्ड करने और लेन‑देन को सुगम बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। MDR का प्रत्यक्ष हिस्सा प्राप्त करके वे अपनी आय को प्रदान की गई सेवाओं के साथ अधिक सुसंगत बनाना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि MDR साझाकरण मॉडल में कोई भी बदलाव NPCI के साथ समन्वय और मौजूदा दिशानिर्देशों में संशोधन की आवश्यकता होगी। एग्रीगेटर्स ने नीति निर्माताओं के साथ संवाद स्थापित करने और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने की तत्परता जताई है।