📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ranjithsiji
खानपान
ओनम 2026: केरल साद्या – बैनाना पत्ते पर परोसी जाने वाली सम्पूर्ण मेन्यू
✍️ Livemint
🗓 26 अग. 2026, 02:19 PM
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यह मार्गदर्शिका ओनम के दौरान केरल के साद्या में बैनाना पत्ते पर परोसी जाने वाली पारंपरिक व्यंजनों के क्रम को विस्तार से बताती है, जिससे परिवार और खाद्य प्रेमी प्रामाणिक अनुभव को पुनः बना सकें।
ओनम 2026 के दौरान केरल की जीवंत सांस्कृतिक धारा को जीवित रखने के लिए बैनाना पत्ते पर परोसी जाने वाली पारंपरिक साद्या पर विशेष ध्यान दिया गया है। लाइवमिंट द्वारा प्रकाशित इस गाइड में हर व्यंजन का क्रम और उसकी तैयारी के तरीके का विस्तृत वर्णन है।
भोजन की शुरुआत चावल और सैम्बार से होती है, जिसके बाद अवियल – नारियल आधारित सब्जी करी, और थोरन – हरी सब्जियों का तड़का लगाया हुआ व्यंजन आता है। इसके बाद पायस, दही, अचार और चटनी जैसे साइड डिश परोसे जाते हैं, जिससे स्वाद का संतुलन बना रहता है।
गाइड में क्षेत्रीय विविधताओं का भी उल्लेख है, जैसे कि केले के चिप्स का प्रयोग या सैम्बार में नारियल दूध मिलाकर गाढ़ा बनाना। पायस को भोजन के अंत में परोसने का समय भी स्पष्ट किया गया है।
परिवारों के लिए यह गाइड एक व्यावहारिक संदर्भ के रूप में काम करेगा, जिससे वे सामग्री की व्यवस्था, पत्ते की तैयारी और पारंपरिक क्रम का पालन कर सकें। इस प्रकार वे केरल साद्या का पूरा अनुभव कर पाएंगे।
साद्या केवल एक भोजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक है जो एकजुटता और मेहमाननवाज़ी को दर्शाता है। 2026 का यह गाइड इस परंपरा को नई पीढ़ियों तक पहुँचाने में मदद करेगा।
भोजन की शुरुआत चावल और सैम्बार से होती है, जिसके बाद अवियल – नारियल आधारित सब्जी करी, और थोरन – हरी सब्जियों का तड़का लगाया हुआ व्यंजन आता है। इसके बाद पायस, दही, अचार और चटनी जैसे साइड डिश परोसे जाते हैं, जिससे स्वाद का संतुलन बना रहता है।
गाइड में क्षेत्रीय विविधताओं का भी उल्लेख है, जैसे कि केले के चिप्स का प्रयोग या सैम्बार में नारियल दूध मिलाकर गाढ़ा बनाना। पायस को भोजन के अंत में परोसने का समय भी स्पष्ट किया गया है।
परिवारों के लिए यह गाइड एक व्यावहारिक संदर्भ के रूप में काम करेगा, जिससे वे सामग्री की व्यवस्था, पत्ते की तैयारी और पारंपरिक क्रम का पालन कर सकें। इस प्रकार वे केरल साद्या का पूरा अनुभव कर पाएंगे।
साद्या केवल एक भोजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक है जो एकजुटता और मेहमाननवाज़ी को दर्शाता है। 2026 का यह गाइड इस परंपरा को नई पीढ़ियों तक पहुँचाने में मदद करेगा।