📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bollywood Hungama
राजनीति
ओम प्रकाश राजभर ने कहा, 2027 के चुनावों से पहले यूपी चार राज्यों में बँट सकता है
✍️ Business Today
🗓 24 सित. 2026, 05:17 PM
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2027 के यूपी विधानसभा चुनावों से पहले, क्षेत्रीय नेता ओम प्रकाश राजभर ने राज्य को चार हिस्सों में बाँटने की पुरानी माँग को फिर से उठाया।
ओम प्रकाश राजभर, जो राज्य की दलित‑केन्द्रित पार्टी के प्रमुख नेता हैं, ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उत्तर प्रदेश को चार अलग‑अलग राज्यों में पुनर्गठित किया जा सकता है। यह बयान 2027 के विधानसभा चुनावों की तीव्र प्रचार अवधि में आया, जहाँ प्रशासनिक दक्षता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के मुद्दे अक्सर उठते रहते हैं।
राजभर का दावा कई दशकों से चल रहे विभाजन विवाद को याद दिलाता है, जिसमें कहा जाता है कि छोटे‑छोटे प्रशासनिक इकाइयाँ शासन को बेहतर बना सकती हैं और क्षेत्रीय असमानताओं को कम कर सकती हैं। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं आया है, उनके बयानों ने राजनीतिक विश्लेषकों और नागरिक समाज के बीच नई चर्चा को जन्म दिया है।
यह टिप्पणी उस समय आई है जब शासक और विपक्षी पार्टियों के चुनावी घोषणापत्र में बुनियादी ढाँचा, शिक्षा और कानून व्यवस्था में सुधार के वादे शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य को विभाजित करने के लिए संविधान में संशोधन और केंद्र‑राज्य दोनों की सहमति आवश्यक होगी, जिससे यह विचार अभी भी दूर का प्रतीत होता है।
वर्तमान में राजभर के बयानों को एक राजनीतिक चर्चा के रूप में देखा जा रहा है, न कि ठोस नीति पहल के रूप में, लेकिन यह उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में विभाजन की थीम की निरंतर प्रासंगिकता को उजागर करता है।
राजभर का दावा कई दशकों से चल रहे विभाजन विवाद को याद दिलाता है, जिसमें कहा जाता है कि छोटे‑छोटे प्रशासनिक इकाइयाँ शासन को बेहतर बना सकती हैं और क्षेत्रीय असमानताओं को कम कर सकती हैं। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं आया है, उनके बयानों ने राजनीतिक विश्लेषकों और नागरिक समाज के बीच नई चर्चा को जन्म दिया है।
यह टिप्पणी उस समय आई है जब शासक और विपक्षी पार्टियों के चुनावी घोषणापत्र में बुनियादी ढाँचा, शिक्षा और कानून व्यवस्था में सुधार के वादे शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य को विभाजित करने के लिए संविधान में संशोधन और केंद्र‑राज्य दोनों की सहमति आवश्यक होगी, जिससे यह विचार अभी भी दूर का प्रतीत होता है।
वर्तमान में राजभर के बयानों को एक राजनीतिक चर्चा के रूप में देखा जा रहा है, न कि ठोस नीति पहल के रूप में, लेकिन यह उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में विभाजन की थीम की निरंतर प्रासंगिकता को उजागर करता है।