📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Adbh266
बिज़नेस
NMDC ने छत्तीसगढ़ में 5,427 करोड़ रुपये की आयरन ओरे प्रोसेसिंग प्लांट का शुभारंभ किया
✍️ Business Standard
🗓 27 सित. 2026, 05:36 PM
👁 15
राष्ट्रीय खनन विकास निगम ने छत्तीसगढ़ में 5,427 करोड़ रुपये मूल्य की नई आयरन ओरे प्रोसेसिंग सुविधा का शुभारंभ किया।
राष्ट्रीय खनन विकास निगम (NMDC) ने छत्तीसगढ़ में एक अत्याधुनिक आयरन‑ओरे प्रोसेसिंग संयंत्र का आधिकारिक शुभारंभ किया है। लगभग 5,427 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से क्षेत्र की खनिज मूल्यवृद्धि क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।
यह संयंत्र बड़े पैमाने पर कच्चा अयस्क संभालने, उच्च‑ग्रेड कंसंट्रेट तैयार करने और घरेलू इस्पात निर्माताओं तथा निर्यात बाजारों को आपूर्ति करने के लिए तैयार किया गया है। आधुनिक क्रशिंग, ग्राइंडिंग और बेनिफिशिएशन तकनीकों के समावेश से संचालन की दक्षता बढ़ेगी और पर्यावरणीय प्रभाव कम होगा।
विश्लेषकों का मानना है कि इस सुविधा के चालू होने से भारत के डाउनस्ट्रीम धातु क्षेत्र को सुदृढ़ता मिलेगी और आयातित प्रोसेस्ड अयस्क पर निर्भरता घटेगी। साथ ही यह परियोजना स्थानीय रोजगार और सहायक उद्योगों के विकास को भी प्रोत्साहित करेगी।
NMDC के अधिकारियों ने बताया कि यह प्रोजेक्ट सरकार की खनिज प्रोसेसिंग को देश के भीतर बढ़ाने की नीति के अनुरूप है और मेक इन इंडिया पहल को सशक्त बनाता है।
अब संयंत्र पूर्णतः कार्यरत है और प्रोसेस्ड अयस्क को राष्ट्रीय इस्पात मिलों को आपूर्ति करने के लिए तैयार है, जिससे मध्य भारत के खनन‑धातु पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ है।
यह संयंत्र बड़े पैमाने पर कच्चा अयस्क संभालने, उच्च‑ग्रेड कंसंट्रेट तैयार करने और घरेलू इस्पात निर्माताओं तथा निर्यात बाजारों को आपूर्ति करने के लिए तैयार किया गया है। आधुनिक क्रशिंग, ग्राइंडिंग और बेनिफिशिएशन तकनीकों के समावेश से संचालन की दक्षता बढ़ेगी और पर्यावरणीय प्रभाव कम होगा।
विश्लेषकों का मानना है कि इस सुविधा के चालू होने से भारत के डाउनस्ट्रीम धातु क्षेत्र को सुदृढ़ता मिलेगी और आयातित प्रोसेस्ड अयस्क पर निर्भरता घटेगी। साथ ही यह परियोजना स्थानीय रोजगार और सहायक उद्योगों के विकास को भी प्रोत्साहित करेगी।
NMDC के अधिकारियों ने बताया कि यह प्रोजेक्ट सरकार की खनिज प्रोसेसिंग को देश के भीतर बढ़ाने की नीति के अनुरूप है और मेक इन इंडिया पहल को सशक्त बनाता है।
अब संयंत्र पूर्णतः कार्यरत है और प्रोसेस्ड अयस्क को राष्ट्रीय इस्पात मिलों को आपूर्ति करने के लिए तैयार है, जिससे मध्य भारत के खनन‑धातु पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ है।