📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ginevrajocosa88
शिक्षा
नालंदा के वीसी ने कहा, 'हमें अपनी खुद की शब्दावली खोजनी चाहिए'
✍️ The Indian Express
🗓 04 अक्टू. 2026, 09:37 AM
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नालंदा विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष सचिन चतुर्वेदी ने भारत को अपनी खुद की शब्दावली विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि उसकी सॉफ्ट पावर को बढ़ाया जा सके।
नालंदा विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष सचिन चतुर्वेदी ने हाल ही में भारत को अपनी खुद की शब्दावली विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, ताकि उसकी सॉफ्ट पावर को मजबूत किया जा सके।
उन्होंने राष्ट्रीय छवि और सांस्कृतिक कूटनीति पर एक मंच पर कहा कि भारत का वैश्विक प्रभाव केवल आर्थिक और राजनीतिक ताकत पर नहीं, बल्कि उसके विचारों और मूल्यों के संप्रेषण के तरीके पर भी निर्भर करता है।
चतुर्वेदी ने नीति निर्माताओं और विद्वानों से आग्रह किया कि वे विदेशी शब्दावली पर अत्यधिक निर्भरता छोड़कर एक विशिष्ट शब्दकोश तैयार करें, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत और समकालीन आकांक्षाओं को दर्शाता हो।
इस पहल का उद्देश्य भारतीय कथाओं को एक स्पष्ट आवाज देना है, जिससे भारतीय परंपरा में निहित अवधारणाएँ विविध दर्शकों के साथ बेहतर तालमेल बिठा सकें।
चतुर्वेदी के बयानों के साथ भारत अपनी सांस्कृतिक पहुँच को बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सॉफ्ट पावर संस्थान और वैश्विक सांस्कृतिक आदान‑प्रदान में भागीदारी को आगे बढ़ा रहा है।
उन्होंने राष्ट्रीय छवि और सांस्कृतिक कूटनीति पर एक मंच पर कहा कि भारत का वैश्विक प्रभाव केवल आर्थिक और राजनीतिक ताकत पर नहीं, बल्कि उसके विचारों और मूल्यों के संप्रेषण के तरीके पर भी निर्भर करता है।
चतुर्वेदी ने नीति निर्माताओं और विद्वानों से आग्रह किया कि वे विदेशी शब्दावली पर अत्यधिक निर्भरता छोड़कर एक विशिष्ट शब्दकोश तैयार करें, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत और समकालीन आकांक्षाओं को दर्शाता हो।
इस पहल का उद्देश्य भारतीय कथाओं को एक स्पष्ट आवाज देना है, जिससे भारतीय परंपरा में निहित अवधारणाएँ विविध दर्शकों के साथ बेहतर तालमेल बिठा सकें।
चतुर्वेदी के बयानों के साथ भारत अपनी सांस्कृतिक पहुँच को बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सॉफ्ट पावर संस्थान और वैश्विक सांस्कृतिक आदान‑प्रदान में भागीदारी को आगे बढ़ा रहा है।