📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendra_Singh_Chau…
देश
एमपी हाई कोर्ट ने महिला को माँ के साथ रहने की अनुमति, पति की हाबियस कॉर्पस याचिका खारिज
✍️ LawBeat
🗓 23 अग. 2026, 03:33 AM
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने महिला को माँ के साथ रहने की अनुमति दी, पति की हाबियस कॉर्पस याचिका को खारिज कर दिया।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक विवाहित महिला को अपनी माँ के साथ रहने की अनुमति दी, जबकि पति द्वारा दायर हाबियस कॉर्पस याचिका को खारिज कर दिया। पति ने अपनी पत्नी को अपने पास लाने के लिए अदालत से आदेश माँगा था, यह दावा करते हुए कि उसे रोका जा रहा है। सुनवाई के बाद न्यायालय ने यह पाया कि महिला की इच्छा के विरुद्ध उसे रहने के लिए मजबूर करने का कोई वैध आधार नहीं है। इसलिए, कोर्ट ने हाबियस कॉर्पस याचिका को खारिज कर दिया और महिला को अपनी माँ के साथ रहने का अधिकार मान्यता दी।
इस निर्णय में किसी पक्ष के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, पर भविष्य में ऐसे विवादों को उचित नागरिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाने की सलाह दी गई। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने वाले स्थापित न्याय सिद्धांतों के अनुरूप है।
यह मामला हाई कोर्ट की भूमिका को उजागर करता है, जहाँ पारिवारिक विवादों में जब अनैच्छिक बंदी की बात आती है, तो हाबियस कॉर्पस का प्रयोग नहीं किया जा सकता, और व्यक्तिगत चयन की स्वायत्तता को प्राथमिकता दी जाती है।
इस निर्णय में किसी पक्ष के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, पर भविष्य में ऐसे विवादों को उचित नागरिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाने की सलाह दी गई। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने वाले स्थापित न्याय सिद्धांतों के अनुरूप है।
यह मामला हाई कोर्ट की भूमिका को उजागर करता है, जहाँ पारिवारिक विवादों में जब अनैच्छिक बंदी की बात आती है, तो हाबियस कॉर्पस का प्रयोग नहीं किया जा सकता, और व्यक्तिगत चयन की स्वायत्तता को प्राथमिकता दी जाती है।