📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Satdeep Gill
बिज़नेस
मोनतेक सिंह अहलूवालिया ने 8% विकास के लिए 1991‑समान सुधारों की माँग की
✍️ Business Today
🗓 29 अग. 2026, 02:40 PM
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अर्थशास्त्री मोनतेक सिंह अहलूवालिया ने कहा, 8% वार्षिक विकास दर पाने के लिए भारत को 1991 के उदारीकरण जैसा व्यापक सुधार पैकेज अपनाना चाहिए।
वित्तीय आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और अनुभवी अर्थशास्त्री मोनतेक सिंह अहलूवालिया ने बिजनेस टुडे को बताया कि भारत को 8% वार्षिक विकास दर हासिल करने के लिए 1991 के उदारीकरण जैसा व्यापक सुधार पैकेज अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि 1991 के सुधारों ने व्यापार को खोलकर, उद्योगों को नियमन मुक्त करके और विदेशी निवेश को आकर्षित करके भारतीय अर्थव्यवस्था को बदल दिया था। आज भी बुनियादी ढाँचा, श्रम बाजार और वित्तीय क्षेत्र में मौजूद अड़चनों को दूर करने के लिए इसी स्तर की नीति‑पुनर्रचना जरूरी है।
अहलूवालिया के अनुसार वर्तमान विकास दर 8% लक्ष्य से कम है और निर्णायक कदमों के बिना अर्थव्यवस्था ठहर सकती है। उन्होंने सरकार से व्यवसाय करने की सुविधा बढ़ाने, नियमों को सरल बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने वाले संरचनात्मक उपाय अपनाने का आग्रह किया।
वे यह भी चेतावनी देते हैं कि सुधार योजना को राजनीतिक रूप से भरोसेमंद और तकनीकी रूप से ठोस होना चाहिए, 1991 के अनुभव से सीख लेकर आज की वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के अनुरूप ढालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 1991 के सुधारों ने व्यापार को खोलकर, उद्योगों को नियमन मुक्त करके और विदेशी निवेश को आकर्षित करके भारतीय अर्थव्यवस्था को बदल दिया था। आज भी बुनियादी ढाँचा, श्रम बाजार और वित्तीय क्षेत्र में मौजूद अड़चनों को दूर करने के लिए इसी स्तर की नीति‑पुनर्रचना जरूरी है।
अहलूवालिया के अनुसार वर्तमान विकास दर 8% लक्ष्य से कम है और निर्णायक कदमों के बिना अर्थव्यवस्था ठहर सकती है। उन्होंने सरकार से व्यवसाय करने की सुविधा बढ़ाने, नियमों को सरल बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने वाले संरचनात्मक उपाय अपनाने का आग्रह किया।
वे यह भी चेतावनी देते हैं कि सुधार योजना को राजनीतिक रूप से भरोसेमंद और तकनीकी रूप से ठोस होना चाहिए, 1991 के अनुभव से सीख लेकर आज की वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के अनुरूप ढालना चाहिए।