📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Education
शिक्षा
मोहरी में मोबाइल बंद पर माता-पिता में टकराव, गेम हार से बच्चों की पढ़ाई‑नींद पर असर
✍️ Amar Ujala · Mohali
🗓 20 अक्टू. 2026, 02:31 AM
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मोहरी के माता‑पिता मोबाइल बंद करने को लेकर बहस कर रहे हैं, क्योंकि गेम में हार से बच्चों में चिड़चिड़ापन देखी जा रही है, जिससे पढ़ाई और नींद पर असर पड़ रहा है।
मोहरी में कई माता‑पिता अपने बच्चों के मोबाइल बंद करने को लेकर सवाल उठाने लगे हैं, क्योंकि हाल ही में वीडियो‑गेम में हार के बाद बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं। यह बहस स्थानीय समुदाय समूहों में शुरू हुई, जहाँ यह चर्चा हो रही है कि क्या मोबाइल उपयोग पर कड़ी रोक बच्चों की पढ़ाई में बाधा डालने वाले मूड स्विंग्स को कम कर सकती है।
नज़दीकी स्कूलों के शिक्षकों ने भी इस चिंता को साझा किया, उन्होंने बताया कि लंबे समय तक गेम खेलने वाले छात्रों में अनुपस्थिति और एकाग्रता की कमी बढ़ी है। कई शिक्षक कहते हैं कि बार‑बार हार से बच्चों में बेचैनी बढ़ती है, जिससे सोने का समय देर हो जाता है और पढ़ाई के घंटे घटते हैं।
स्थानीय मीडिया द्वारा संपर्क किए गए बाल मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की बजाय स्पष्ट स्क्रीन‑टाइम सीमाएँ और वैकल्पिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना अधिक प्रभावी हो सकता है। वे चेतावनी देते हैं कि बिना संवाद के कठोर प्रतिबंध से प्रतिरोध और तनाव बढ़ सकता है।
विचार-विमर्श जारी है, कई अभिभावक‑शिक्षक संघ आगामी बैठकों में ऐसे दिशा‑निर्देश तैयार करने की योजना बना रहे हैं जो शैक्षणिक प्रदर्शन और मानसिक स्वास्थ्य दोनों की रक्षा करे, साथ ही आधुनिक बाल्यावस्था में डिजिटल मनोरंजन की भूमिका को भी मान्यता दे।
नज़दीकी स्कूलों के शिक्षकों ने भी इस चिंता को साझा किया, उन्होंने बताया कि लंबे समय तक गेम खेलने वाले छात्रों में अनुपस्थिति और एकाग्रता की कमी बढ़ी है। कई शिक्षक कहते हैं कि बार‑बार हार से बच्चों में बेचैनी बढ़ती है, जिससे सोने का समय देर हो जाता है और पढ़ाई के घंटे घटते हैं।
स्थानीय मीडिया द्वारा संपर्क किए गए बाल मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की बजाय स्पष्ट स्क्रीन‑टाइम सीमाएँ और वैकल्पिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना अधिक प्रभावी हो सकता है। वे चेतावनी देते हैं कि बिना संवाद के कठोर प्रतिबंध से प्रतिरोध और तनाव बढ़ सकता है।
विचार-विमर्श जारी है, कई अभिभावक‑शिक्षक संघ आगामी बैठकों में ऐसे दिशा‑निर्देश तैयार करने की योजना बना रहे हैं जो शैक्षणिक प्रदर्शन और मानसिक स्वास्थ्य दोनों की रक्षा करे, साथ ही आधुनिक बाल्यावस्था में डिजिटल मनोरंजन की भूमिका को भी मान्यता दे।