📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / The open draft
धर्म
सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में 25 अगस्त को 11 किमी कांवड़ यात्रा, लाखों श्रद्धालु भाग लेंगे
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 25 अग. 2026, 06:49 AM
👁 5
25 अगस्त को सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में श्रद्धालु सीवन नदी का जल लेकर 11 किमी कांवड़ यात्रा करेंगे, जिससे भगवान शिव का जलाभिषेक होगा।
सीहोर, मध्य प्रदेश – 25 अगस्त को सीवन नदी के किनारे से शुरू होकर कुबेरेश्वर धाम तक 11 किमी की पवित्र कांवड़ यात्रा आयोजित की जाएगी। श्रद्धालु प्रत्येक अपने कांवड़ में नदी का जल लेकर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए पैदल यात्रा करेंगे।
आयोजकों का अनुमान है कि लाखों कांवड़िए इस यात्रा में भाग लेंगे, जिससे यह वर्ष का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बन जाएगा। यह यात्रा प्राकृतिक जल स्रोत से पवित्र जल लेकर मंदिर में अर्पित करने की प्राचीन परम्परा को दर्शाती है।
यात्रा सुबह के सूर्योदय के साथ शुरू होगी और प्रतिभागियों को समूहों में व्यवस्थित किया जाएगा ताकि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। स्थानीय पुलिस और चिकित्सा दल अतिरिक्त रूप से तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति का त्वरित निपटारा किया जा सके।
कुबेरेश्वर धाम, जो भगवान शिव को समर्पित है, मध्य प्रदेश और पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। 2024 की कांवड़ यात्रा आध्यात्मिक एकता और सामुदायिक सद्भाव को मजबूत करने की उम्मीद है।
यात्रा का समापन मंदिर में बड़े जलअभिषेक समारोह के साथ होगा, जहाँ एकत्रित जल को शिवलिंग पर प्रवाहित किया जाएगा, जिससे यात्रा का पवित्र अंत होगा।
आयोजकों का अनुमान है कि लाखों कांवड़िए इस यात्रा में भाग लेंगे, जिससे यह वर्ष का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बन जाएगा। यह यात्रा प्राकृतिक जल स्रोत से पवित्र जल लेकर मंदिर में अर्पित करने की प्राचीन परम्परा को दर्शाती है।
यात्रा सुबह के सूर्योदय के साथ शुरू होगी और प्रतिभागियों को समूहों में व्यवस्थित किया जाएगा ताकि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। स्थानीय पुलिस और चिकित्सा दल अतिरिक्त रूप से तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति का त्वरित निपटारा किया जा सके।
कुबेरेश्वर धाम, जो भगवान शिव को समर्पित है, मध्य प्रदेश और पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। 2024 की कांवड़ यात्रा आध्यात्मिक एकता और सामुदायिक सद्भाव को मजबूत करने की उम्मीद है।
यात्रा का समापन मंदिर में बड़े जलअभिषेक समारोह के साथ होगा, जहाँ एकत्रित जल को शिवलिंग पर प्रवाहित किया जाएगा, जिससे यात्रा का पवित्र अंत होगा।