📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / President's Secretariat
राजनीति
मेघालय बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने बहिष्कार आह्वान और ‘गो बैक अमित कुमार’ बैनरों की निंदा की
✍️ India Today NE
🗓 02 अक्टू. 2026, 12:01 PM
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मेघालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बहिष्कार के आह्वान को खारिज किया और “गो बैक अमित कुमार” बैनरों की निंदा की। यह बयान राज्य में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच दिया गया।
मेघालय के वरिष्ठ विधिक संघ ने हाल ही में अमित कुमार नामक एक राजनेता को लक्षित करने वाले बहिष्कार अभियान का कड़ा विरोध किया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि यह आह्वान कानून के शासन को कमजोर करता है और विधि पेशे की निष्पक्षता को खतरे में डालता है।
एक लिखित बयान में अध्यक्ष ने बताया कि “गो बैक अमित कुमार” बैनर सार्वजनिक स्थानों पर लगाना एक प्रकार की धमकी है, जो न्यायिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने राजनीतिक दलों और नागरिक समाज को विधिक समुदाय को पार्टियों के बीच के संघर्ष में प्रयोग करने से रोकने का अनुरोध किया।
संघ ने आगे कहा कि वह बैनरों की आगे की किसी भी कोशिश को क़ानूनी कार्रवाई के माध्यम से रोकने के लिए निगरानी करेगा। अध्यक्ष ने शांति और लोकतांत्रिक मानदंडों का सम्मान करने की अपील की, यह रेखांकित करते हुए कि पेशेवर संस्थाओं को तटस्थ रहना चाहिए।
अभी तक अमित कुमार या उनके प्रतिनिधियों से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है, और स्थानीय अधिकारियों ने बैनरों की वैधता पर टिप्पणी नहीं की है।
यह घटना मेघालय में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच आई है, जहाँ समुदाय के नेताओं ने कानूनी संस्थानों की पवित्रता को बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है।
एक लिखित बयान में अध्यक्ष ने बताया कि “गो बैक अमित कुमार” बैनर सार्वजनिक स्थानों पर लगाना एक प्रकार की धमकी है, जो न्यायिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने राजनीतिक दलों और नागरिक समाज को विधिक समुदाय को पार्टियों के बीच के संघर्ष में प्रयोग करने से रोकने का अनुरोध किया।
संघ ने आगे कहा कि वह बैनरों की आगे की किसी भी कोशिश को क़ानूनी कार्रवाई के माध्यम से रोकने के लिए निगरानी करेगा। अध्यक्ष ने शांति और लोकतांत्रिक मानदंडों का सम्मान करने की अपील की, यह रेखांकित करते हुए कि पेशेवर संस्थाओं को तटस्थ रहना चाहिए।
अभी तक अमित कुमार या उनके प्रतिनिधियों से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है, और स्थानीय अधिकारियों ने बैनरों की वैधता पर टिप्पणी नहीं की है।
यह घटना मेघालय में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच आई है, जहाँ समुदाय के नेताओं ने कानूनी संस्थानों की पवित्रता को बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है।