📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Onef9day
धर्म
चित्तौड़गढ़ किले में मीरा बाई की 500 साल पुरानी कृष्ण भक्ति
✍️ Amar Ujala · Udaipur
🗓 04 सित. 2026, 10:32 AM
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चित्तौड़गढ़ किला, जो शौर्य की कहानी कहता है, अब मीरा बाई की बचपन से ही कृष्ण के प्रति अटूट प्रेम को भी सम्मानित करता है, जो कुड़की गांव में जन्मी थीं।
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ किले को शक्ति, वीरता और बलिदान की गाथा के रूप में जाना जाता है, पर अब यह संत कवयित्री मीरा बाई की कृष्ण भक्ति को भी सम्मानित करता है। किले की सांस्कृतिक कथा में मीरा की अटूट प्रेम कहानी शामिल हो गई है, जिसने उनके काव्य और आध्यात्मिक पथ को आकार दिया।
मेड़ता के पास कुड़की गांव में जन्मी मीरा ने बचपन से ही कृष्ण को अपना आराध्य माना। उनका जीवन भर का भक्ति भाव, कविताओं और भजनों में अभिव्यक्त, इस क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत का अभिन्न हिस्सा बन गया है, जो तीर्थयात्रियों और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करता है।
आज किले के आगंतुक मीरा की भक्ति के संकेत देखते हैं, जिससे चित्तौड़गढ़ की दोहरी पहचान—सैन्य गौरव और दिव्य प्रेम—और भी स्पष्ट होती है। पाँच शताब्दी पुरानी यह जुड़ाव दर्शाता है कि किला इतिहासिक शौर्य के साथ-साथ अनन्त प्रेम को भी जीवित रखता है।
मेड़ता के पास कुड़की गांव में जन्मी मीरा ने बचपन से ही कृष्ण को अपना आराध्य माना। उनका जीवन भर का भक्ति भाव, कविताओं और भजनों में अभिव्यक्त, इस क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत का अभिन्न हिस्सा बन गया है, जो तीर्थयात्रियों और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करता है।
आज किले के आगंतुक मीरा की भक्ति के संकेत देखते हैं, जिससे चित्तौड़गढ़ की दोहरी पहचान—सैन्य गौरव और दिव्य प्रेम—और भी स्पष्ट होती है। पाँच शताब्दी पुरानी यह जुड़ाव दर्शाता है कि किला इतिहासिक शौर्य के साथ-साथ अनन्त प्रेम को भी जीवित रखता है।