📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vice President's Secretariat
कृषि
मणिपुर ने जुम से सतत पहाड़ी खेती की ओर बदलाव की घोषणा
✍️ e-pao.net
🗓 05 अग. 2026, 02:49 PM
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मणिपुर सरकार ने जुम खेती को बदलकर सतत पहाड़ी खेती को अपनाने की नई नीति की घोषणा की, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और आजीविका सुधारना है।
मणिपुर सरकार ने आज घोषणा की कि राज्य में पारंपरिक जुम (स्लैश‑एंड‑बर्न) खेती को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करके सतत पहाड़ी खेती को अपनाया जाएगा।
जुम खेती, जो पीढ़ियों से पहाड़ी जनजातियों का प्रमुख कृषि पद्धति रही है, वनों की कटाई, मिट्टी के कटाव और जैव विविधता के नुकसान से जुड़ी रही है। नई नीति इन पर्यावरणीय समस्याओं को हल करने के साथ-साथ पहाड़ी समुदायों के आजीविका को भी सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखती है।
योजना के तहत किसानों को टेरेस खेती, एग्रोफोरेस्ट्री और मिश्रित फसल प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे मिट्टी और पानी का संरक्षण सुनिश्चित हो सके। सरकार तकनीकी सहायता, बीज सब्सिडी और बाज़ार कनेक्शन प्रदान करेगी।
कार्यान्वयन अगले वित्तीय वर्ष से शुरू होने वाला है, जिसमें सबसे ज़रूरतमंद जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार आशा करती है कि यह कदम पहाड़ों की रक्षा करेगा, कृषि उत्पादकता बढ़ाएगा और स्थानीय किसानों के लिए नई आय के अवसर पैदा करेगा।
जुम खेती, जो पीढ़ियों से पहाड़ी जनजातियों का प्रमुख कृषि पद्धति रही है, वनों की कटाई, मिट्टी के कटाव और जैव विविधता के नुकसान से जुड़ी रही है। नई नीति इन पर्यावरणीय समस्याओं को हल करने के साथ-साथ पहाड़ी समुदायों के आजीविका को भी सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखती है।
योजना के तहत किसानों को टेरेस खेती, एग्रोफोरेस्ट्री और मिश्रित फसल प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे मिट्टी और पानी का संरक्षण सुनिश्चित हो सके। सरकार तकनीकी सहायता, बीज सब्सिडी और बाज़ार कनेक्शन प्रदान करेगी।
कार्यान्वयन अगले वित्तीय वर्ष से शुरू होने वाला है, जिसमें सबसे ज़रूरतमंद जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार आशा करती है कि यह कदम पहाड़ों की रक्षा करेगा, कृषि उत्पादकता बढ़ाएगा और स्थानीय किसानों के लिए नई आय के अवसर पैदा करेगा।