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30 Oct 2026•
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लेकिन बांसवाड़ा के गनोड़ा तहसील स्थित भुसावल ग्राम पंचायत का एक गांव अलग ही मिसाल पेश करता है

✍️ Reporter: Mohammad Jakir Khan 🗓 30 Oct 2026, 05:08 PM 👁 10
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भुसावल ग्राम पंचायत का सज्जन सिंह का गढ़ एक गांव अलग ही मिसाल पेश कर रहा है यहां वर्ष 1992 से आज तक वार्ड पंच चुनने के लिए अभी तक मातदान नहीं हुआ

संवाददाता जाकिर खान, जयपुर
राजस्थान में पंचायत चुनाव आते ही गांवों में उम्मीदवारों के बीच मुकाबला शुरू हो जाता है। कहीं प्रचार, कहीं खींचतान तो कहीं वोटों को लेकर विवाद देखने को मिलते हैं। लेकिन बांसवाड़ा के गनोड़ा तहसील स्थित भुवासा ग्राम पंचायत का सज्जन सिंह का गढ़ गांव एक अलग ही मिसाल पेश कर रहा है। यहां वर्ष 1952 से आज तक वार्ड पंच चुनने के लिए कभी मतदान नहीं हुआ। गांव में जाजम पर बैठकर आपसी सहमति से ही प्रतिनिधि चुनने की परंपरा चली आ रही है।
राजपूत और आदिवासी समाज मिलकर लेते हैं फैसला
गांव की खास बात यह है कि वार्ड की सीट सामान्य वर्ग की हो या अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित, दोनों समाजों के लोग एक साथ बैठकर उम्मीदवार तय करते हैं। आपसी बातचीत और सहमति के बाद निर्विरोध पंच चुना जाता है। यही वजह है कि 1952 से अब तक यहां वार्ड पंच के चुनाव में वोट डालने की नौबत नहीं आई।
दो वार्ड बने, दोनों में निर्विरोध चुने गए पंच
पहले गांव में एक ही वार्ड था, लेकिन आबादी बढ़ने के साथ अब दो वार्ड बना दिए गए हैं। इस बार सामान्य वर्ग के वार्ड संख्या एक से तारा कुंवर और एसटी आरक्षित वार्ड संख्या दो से लसी देवी निर्विरोध वार्ड पंच चुनी गई हैं। दोनों वार्डों में क्रमशः 192 और 204 मतदाता हैं। यानी कुल 396 मतदाता होने के बावजूद मतदान की जरूरत नहीं पड़ी।
निर्विरोध चयन के बाद ग्रामीणों ने गांव के चौराहे पर दोनों महिला पंचों का माला पहनाकर स्वागत किया।
चौपाल पर ही सुलझ जाते हैं विवाद
गांव में भाईचारे की परंपरा सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है। छोटे-बड़े विवाद होने पर भी ग्रामीण पहले जाजम पर बैठकर बातचीत करते हैं और आपसी समझाइश से समाधान निकालने का प्रयास करते हैं। यही सामाजिक एकता और आपसी विश्वास इस गांव को दूसरे गांवों से अलग पहचान दिलाता है।
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