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05 Nov 2026•
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Religion

लोक आस्था का महापर्व छठ प्रकृति की रक्षा, पर्यावरण संरक्षण,स्वच्छता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है,सेक्टर-75 के सेंट्रल पार्क में छठ घाट का निर्माण कार्य जोरों पर: डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा।

✍️ Reporter: Rajesh Mandal 🗓 05 Nov 2026, 05:09 PM 👁 17
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Rajesh mandal

नोएडा।अखिल भारतीय प्रवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व श्री सूर्यदेव पूजा समिति नोएडा के अध्यक्ष डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा ने लोक आस्था के महापर्व छठ के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छठ महापर्व भारतीय संस्कृति,आस्था,श्रद्धा,प्रकृति प्रेम और सामाजिक एकता का अनुपम प्रतीक है।यह भगवान सूर्य एवं छठी मैया की उपासना का विश्वविख्यात पर्व है।यह महापर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने,पर्यावरण की रक्षा करने,स्वच्छता अपनाने तथा समाज में भाईचारा एवं सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा ने बताया कि मूलतः सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा जाता है। यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है।पहली बार चैत्र मास में मनाए जाने वाले पर्व को चैती छठ तथा दूसरी बार कार्तिक मास में मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है।यह पर्व पारिवारिक सुख-समृद्धि,पति एवं संतान की रक्षा,दीर्घायु जीवन तथा मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धा एवं निष्ठा के साथ मनाया जाता है।इस व्रत को महिलाएं और पुरुष समान रूप से करते हैं।
डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा ने बताया कि छठ व्रत के संबंध में अनेक पौराणिक एवं लोककथाएं प्रचलित हैं।एक प्रचलित मान्यता के अनुसार,जब पांडव अपना समस्त राजपाट जुए में हार गए थे,तब द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण के सुझाव पर छठ व्रत किया था।इसके फलस्वरूप उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हुईं और पांडवों को पुनः अपना राजपाट प्राप्त हुआ।लोक परंपरा के अनुसार भगवान सूर्य और छठी मैया का संबंध भाई-बहन का माना जाता है।यह भी मान्यता है कि लोकमातृका षष्ठी की प्रथम पूजा भगवान सूर्य ने ही की थी।डॉ॰शर्मा ने कहा कि छठ महापर्व की परंपराओं में प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश निहित है।इस पर्व में भगवान सूर्य,जल,वायु,पृथ्वी तथा प्रकृति के विभिन्न तत्वों की उपासना की जाती है।व्रती नदी,तालाब एवं अन्य जलाशयों के किनारे अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।इस दौरान स्वच्छता,पवित्रता,अनुशासन और संयम का विशेष ध्यान रखा जाता है।
उन्होंने कहा कि छठ पर्व की वैज्ञानिक व्याख्याओं के संबंध में भी अनेक विचार प्रचलित हैं,लेकिन इसके पर्यावरणीय एवं सामाजिक महत्व को प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। इस पर्व के अवसर पर लोग सामूहिक रूप से घाटों,जलाशयों,सड़कों और आसपास के क्षेत्रों की साफ-सफाई करते हैं।इससे स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ती है तथा जलस्रोतों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश समाज तक पहुंचता है।
डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा ने बताया कि छठ महापर्व चार दिनों तक मनाया जाता है।इसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है।पहले दिन व्रती स्नान करके पवित्रता के साथ व्रत का संकल्प लेते हैं तथा सेंधा नमक,अरवा चावल,चना दाल और कद्दू की सब्जी ग्रहण करते हैं।
दूसरे दिन खरना अथवा लोहंडा मनाया जाता है। इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखते हैं तथा शाम को गुड़ की खीर एवं अन्य प्रसाद बनाकर पूजा-अर्चना करते हैं।खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत प्रारंभ होता है।
तीसरे दिन अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को नदी, तालाब अथवा अन्य जलाशयों में खड़े होकर जल एवं दूध से अर्घ्य अर्पित किया जाता है। चौथे एवं अंतिम दिन प्रातःकाल उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।इसके पश्चात व्रती पारण करते हैं और चार दिवसीय छठ महापर्व का विधिवत समापन होता है।
उन्होंने बताया कि इस पर्व में पवित्रता एवं शुद्धता का विशेष महत्व है।पूजा में लहसुन और प्याज का प्रयोग वर्जित माना जाता है।छठ के पारंपरिक एवं भक्तिमय गीत वातावरण को आध्यात्मिक बना देते हैं।वर्तमान समय में पंडालों की सजावट,सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा अन्य धार्मिक आयोजनों के माध्यम से भी इस पर्व की भव्यता बढ़ रही है।
डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा ने कहा कि छठ महापर्व सामाजिक समरसता और सामूहिक सहयोग का भी अद्भुत उदाहरण है।इस पर्व में जाति,वर्ग,भाषा और आर्थिक स्थिति के भेदभाव से ऊपर उठकर सभी लोग एक साथ पूजा-अर्चना करते हैं।घाटों की सफाई,पूजा की तैयारियों,प्रसाद वितरण और अन्य व्यवस्थाओं में समाज के सभी वर्गों के लोग मिल-जुलकर सहयोग करते हैं।अर्घ्य के समय दूध,फल एवं पूजा सामग्री का वितरण भी सेवा,सहयोग और परोपकार की भावना को मजबूत करता है।
अखिल भारतीय प्रवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि छठ पूजा के दौरान जलाशयों एवं नदियों को स्वच्छ रखें,प्लास्टिक और प्रतिबंधित सामग्री का प्रयोग न करें,जल को प्रदूषित न करें तथा अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों से बचें।छठ महापर्व की वास्तविक भावना तभी सार्थक होगी, जब हम धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प भी लें।
डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा ने कहा कि छठ महापर्व बिहार,झारखंड,पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख लोकपर्व है।अब यह पर्व भारत के लगभग सभी राज्यों तथा विदेशों में भी रहने वाले भारतीय समुदायों द्वारा अत्यंत श्रद्धा,भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया जाता है।यह भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं और विश्वभर में भारतीय समाज की सांस्कृतिक एकता का परिचायक है।
अखिल भारतीय प्रवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा ने बताया कि नोएडा में भी छठ महापर्व अत्यंत धूमधाम,श्रद्धा एवं भव्यता के साथ मनाया जाता है।नोएडा के सेक्टर-4, 5, 8, 9, 10, 11, 12, 15, 16, 19, 20, 31, 34, 37, 45, 49, 52, 61, 62, 66, 70, 71, 73, 75, 76, 77, 78, 82, 93, 99, 100, 105, 110 एवं 122 सहित भंगेल, सलारपुर, सदरपुर, छलेरा, बरौला, गिझौर, होशियारपुर,गढ़ी चौखंडी,छिजारसी,मामूरा, सरफाबाद,सोरखा,चौड़ा,नवादा तथा नोएडा के अधिकांश गांवों एवं सेक्टरों में श्रद्धालु बड़े उत्साह से छठ महापर्व मनाते हैं।
डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा ने समस्त देशवासियों से छठ महापर्व को श्रद्धा,पवित्रता,स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की भावना के साथ मनाने का आह्वान करते हुए भगवान सूर्य एवं छठी मैया से सभी के सुख,शांति,समृद्धि,उत्तम स्वास्थ्य एवं मंगलमय जीवन की कामना की है।
सेक्टर-75 के सेंट्रल पार्क में एएमजी डेवलपर्स के सहयोग से श्री सूर्यदेव पूजा समिति नोएडा द्वारा बहुत सुंदर छठ घाट का निर्माण कराया जा रहा है।निर्माण कार्य जोरों से चल रहा है और दीपावली से पूर्व छठ घाट पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा।समिति के अध्यक्ष डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा,संयोजक ओपी तिवारी और महासचिव राजीव त्यागी ने छठ घाट के निर्माण में सहयोग के लिए एएमजी के निदेशक मनोज राय,अमित कुमार,जीएम बसंत उपाध्याय और सुनील मैनी को धन्यवाद दिया है।
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