📷 चित्र स्रोत: TOI City (via NewsData)
टेक्नोलॉजी
कोच्चि के नवप्रवर्तक ने मड‑क्रैब खेती को बदला, ₹10 लाख अनुदान मिला
✍️ TOI City
🗓 20 अग. 2026, 06:41 PM
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कोच्चि के दो स्नातकोत्तर छात्रों ने मड‑क्रैब खेती में कैनिबलिज़्म और खारे पानी की आवश्यकता को समाप्त करने वाली तकनीक विकसित की, जिससे आंतरिक क्षेत्रों में मछली पालन संभव हुआ। इस नवाचार को राष्ट्रीय पुरस्कार और ₹10 लाख अनुदान मिला।
कोच्चि के यूनिवर्सिटी ऑफ़ केरल के दो स्नातकोत्तर छात्रों ने मड‑क्रैब पालन में लंबे समय से चल रही समस्या, कैनिबलिज़्म और खारे पानी पर निर्भरता, को सुलझाया। उनकी नई प्रणाली एक विशेष टैंक और बायो‑फ़िल्टर का उपयोग करती है जो प्राकृतिक परिस्थितियों की नकल करता है, जिससे क्रैब ताज़ा पानी में भी पनपते हैं और आपसी संघर्ष कम होता है। पायलट फार्म में प्रोटोटाइप का परीक्षण करने पर जीवित रहने की दर में 40 % की वृद्धि पाई गई।
इस नवाचार ने राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन का ध्यान आकर्षित किया, जिसने टीम को तकनीक को विस्तारित करने के लिए ₹10 लाख अनुदान दिया। यह धनराशि उन्हें व्यावसायिक उत्पादन लाइन बनाने और किसानों को प्रशिक्षण देने में मदद करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भारत के आंतरिक क्षेत्रों में प्रीमियम क्रैब पालन को संभव बना सकती है, जहाँ खारे पानी की कमी है। इस अभ्यास को अधिक सुलभ बनाकर, यह स्टार्टअप हजारों छोटे मछुआरों की आय बढ़ा सकता है और देश के मछली पालन क्षेत्र को विविध बना सकता है।
इस नवाचार ने राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन का ध्यान आकर्षित किया, जिसने टीम को तकनीक को विस्तारित करने के लिए ₹10 लाख अनुदान दिया। यह धनराशि उन्हें व्यावसायिक उत्पादन लाइन बनाने और किसानों को प्रशिक्षण देने में मदद करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भारत के आंतरिक क्षेत्रों में प्रीमियम क्रैब पालन को संभव बना सकती है, जहाँ खारे पानी की कमी है। इस अभ्यास को अधिक सुलभ बनाकर, यह स्टार्टअप हजारों छोटे मछुआरों की आय बढ़ा सकता है और देश के मछली पालन क्षेत्र को विविध बना सकता है।