📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Shivanjan
बिज़नेस
किशौ प्रोजेक्ट के 660 MW बाँध में देरी के कारण
✍️ The Indian Express
🗓 16 सित. 2026, 01:01 AM
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660 MW की किशौ बाँध की निर्माण में देरी हुई है, जिससे कारण और नई परिस्थितियों पर चर्चा चल रही है।
किशौ प्रोजेक्ट, जो 660 मेगावॉट की शक्ति उत्पादन करने वाला जलविद्युत योजना है, अपने निर्माण समय‑सारिणी में देरी का सामना कर रहा है। इस विलंब ने हितधारकों और जनता का ध्यान आकर्षित किया है, जो कारणों को समझना चाहते हैं।
अधिकारिक बयान में विशेष कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है, परन्तु बड़े‑पैमाने पर बुनियादी ढाँचे के प्रोजेक्ट अक्सर भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी या वित्तीय समायोजन जैसी चुनौतियों से जूझते हैं। इनमें से कोई भी कारक देरी का कारण हो सकता है।
हाल ही में यह संकेत मिला है कि परियोजना की समय‑सारिणी में संशोधन किया गया है और प्राधिकरण ने पहले की बाधाओं को दूर करने के कदम उठाए हैं। नया योजना बाँध को फिर से ट्रैक पर लाने का लक्ष्य रखती है, परन्तु ठोस समय‑सीमा अभी स्पष्ट नहीं हुई है।
एक बार संचालन में आने पर किशौ बाँध क्षेत्रीय बिजली आपूर्ति को सुदृढ़ करेगा और देश के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों में योगदान देगा। इसकी प्रगति नीति निर्माताओं के लिए एक प्रमुख बिंदु बनी हुई है।
अधिकारिक बयान में विशेष कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है, परन्तु बड़े‑पैमाने पर बुनियादी ढाँचे के प्रोजेक्ट अक्सर भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी या वित्तीय समायोजन जैसी चुनौतियों से जूझते हैं। इनमें से कोई भी कारक देरी का कारण हो सकता है।
हाल ही में यह संकेत मिला है कि परियोजना की समय‑सारिणी में संशोधन किया गया है और प्राधिकरण ने पहले की बाधाओं को दूर करने के कदम उठाए हैं। नया योजना बाँध को फिर से ट्रैक पर लाने का लक्ष्य रखती है, परन्तु ठोस समय‑सीमा अभी स्पष्ट नहीं हुई है।
एक बार संचालन में आने पर किशौ बाँध क्षेत्रीय बिजली आपूर्ति को सुदृढ़ करेगा और देश के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों में योगदान देगा। इसकी प्रगति नीति निर्माताओं के लिए एक प्रमुख बिंदु बनी हुई है।