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20 अग. 2026
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केरल हाई कोर्ट ने ईसाई महिलाओं को वर्तमान निवास से तलाक की दायर करने की अनुमति दी
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Augustus Binu/ www.dreamsparrow.net/ facebook
धर्म

केरल हाई कोर्ट ने ईसाई महिलाओं को वर्तमान निवास से तलाक की दायर करने की अनुमति दी

✍️ LatestLY 🗓 20 अग. 2026, 01:34 PM 👁 6
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केरल हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ईसाई महिलाएँ अपने वर्तमान निवास वाले जिले में तलाक की याचिका दाखिल कर सकती हैं, जिससे वैवाहिक कानून की प्रक्रियात्मक बाधाएँ कम होंगी।

केरल हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि ईसाई महिलाएँ अपने वर्तमान निवास वाले जिले में तलाक की याचिका दाखिल कर सकती हैं। पहले वैवाहिक कानून की व्याख्या के अनुसार याचिका को विवाह स्थल या पति के निवास स्थान पर ही दायर करना पड़ता था, जिससे कई महिलाओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की वर्तमान निवास स्थान अधिकार क्षेत्र का वैध आधार है, जिससे व्यक्तिगत कानून में पहुँच और लैंगिक समानता के सिद्धांतों को बल मिलता है। यह आदेश राज्य भर में ईसाई परिवारों के लिए तलाक की प्रक्रिया को सरल बनाने की उम्मीद है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अन्य व्यक्तिगत कानून समुदायों के लिए भी एक मिसाल स्थापित कर सकता है, जिससे अधिकार क्षेत्र के मानदंडों की पुनः समीक्षा हो सकती है। यह आदेश तलाक के मूल कारणों को नहीं बदलता, केवल याचिका दाखिल करने के स्थान को विस्तारित करता है।

यह निर्णय थिरुवनंतपुरम स्थित केरल हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच द्वारा सुनाया गया और तुरंत प्रभावी हो गया, जिससे महिलाओं को अपने मामलों के लिए अधिक सुविधाजनक मंच मिल सकेगा।
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