शिक्षा
कटनी में जिला स्तरीय शोध समिति की बैठक, NEP 2020 के अनुरूप शिक्षण-अधिगम प्रभावशीलता पर चर्चा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुशंसाओं को ध्यान में रखते हुए कटनी के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में जिला स्तरीय शोध समिति की प्रथम बैठक संपन्न हुई। बैठक में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए लघु अवधि और क्रियात्मक शोध पर विस्तृत चर्चा की गई।
कटनी में राज्य शिक्षा केंद्र और जिला कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देशानुसार जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में जिला स्तरीय शोध समिति की प्रथम बैठक का आयोजन किया गया। डाइट की प्राचार्य एम.पी. डुंगडुंग के मार्गदर्शन में हुई इस बैठक में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा निर्धारित विषयों पर लघु अवधि शोध एवं क्रियात्मक शोध कराए जाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई।
जिला शोध प्रभारी श्री उमाशंकर सैनी ने बैठक में बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुशंसाओं के अनुरूप शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (एफएलएन) तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा जैसी योजनाओं को शामिल किया गया है। इन पहलों की प्रभावशीलता का आकलन करने और शिक्षण प्रक्रियाओं के परिणामों को परखने के लिए शैक्षणिक शोध अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं का दायित्व शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार करना, नवाचारों की प्रभावशीलता का परीक्षण करना तथा शोध कार्यों का मूल्यांकन करना है। इसी उद्देश्य से वर्तमान शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप सभी प्रशिक्षण संस्थाओं को शोध विषय आवंटित किए गए हैं।
इस बैठक में डॉ. अनिल कुमार मिश्रा, श्री राकेश कुमार सिन्नरकर, श्री कमलेश कुमार सोनी, श्री पुष्पेन्द्र गुरु, श्री ओमप्रकाश विश्वकर्मा, श्री संदीप कुमार त्रिपाठी, श्रीमती रमा यादव एवं श्री राजेश कुमार गुप्ता उपस्थित रहे।
जिला शोध प्रभारी श्री उमाशंकर सैनी ने बैठक में बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुशंसाओं के अनुरूप शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (एफएलएन) तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा जैसी योजनाओं को शामिल किया गया है। इन पहलों की प्रभावशीलता का आकलन करने और शिक्षण प्रक्रियाओं के परिणामों को परखने के लिए शैक्षणिक शोध अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं का दायित्व शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार करना, नवाचारों की प्रभावशीलता का परीक्षण करना तथा शोध कार्यों का मूल्यांकन करना है। इसी उद्देश्य से वर्तमान शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप सभी प्रशिक्षण संस्थाओं को शोध विषय आवंटित किए गए हैं।
इस बैठक में डॉ. अनिल कुमार मिश्रा, श्री राकेश कुमार सिन्नरकर, श्री कमलेश कुमार सोनी, श्री पुष्पेन्द्र गुरु, श्री ओमप्रकाश विश्वकर्मा, श्री संदीप कुमार त्रिपाठी, श्रीमती रमा यादव एवं श्री राजेश कुमार गुप्ता उपस्थित रहे।