📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ramesh Lalwani
शिक्षा
कर्नाटक ने करवार मेडिकल कॉलेज का नाम रामकृष्ण हेगड़े के नाम पर रखने का फैसला
✍️ The Economic Times
🗓 29 अग. 2026, 11:04 PM
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कर्नाटक सरकार ने करवार के मेडिकल कॉलेज का नाम पूर्व मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े के नाम पर रखने का निर्णय लिया, यह घोषणा डिपीसीएम डीके शिवाकुमार ने की।
डिपीसीएम डीके शिवाकुमार ने पत्रकारों को बताया कि कर्नाटक सरकार करवार के सरकारी मेडिकल कॉलेज का नाम दिवंगत रामकृष्ण हेगड़े के नाम पर रखेगी। यह घोषणा बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान की गई और आधिकारिक आदेश के माध्यम से इस महीने के अंत तक लागू की जाएगी।
करवार मेडिकल कॉलेज, जो 2019 में स्थापित हुआ था, उत्तर कर्नाटक के तटीय जिलों और आसपास के क्षेत्रों में स्नातक तथा स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा प्रदान करता है। यह संस्थान दूरस्थ कोंकण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
रामकृष्ण हेगड़े, जिन्होंने 1983 से 1990 तक तीन कार्यकाल में कर्नाटक की मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की, अपने विकेंद्रीकरण, ग्रामीण विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधारों के लिए जाने जाते हैं। उनका नाम कॉलेज पर रखने से उनका योगदान सम्मानित होगा और भविष्य के चिकित्सकों को प्रेरणा मिलेगी।
राज्य अधिकारियों ने बताया कि नाम परिवर्तन में संकेतक, आधिकारिक दस्तावेज़ और कॉलेज की डिजिटल उपस्थिति को अद्यतन करना शामिल होगा। अब तक कोई विरोध या विवाद नहीं देखा गया है और यह कदम स्थानीय नेताओं व पूर्व छात्रों द्वारा सराहा गया है।
करवार मेडिकल कॉलेज, जो 2019 में स्थापित हुआ था, उत्तर कर्नाटक के तटीय जिलों और आसपास के क्षेत्रों में स्नातक तथा स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा प्रदान करता है। यह संस्थान दूरस्थ कोंकण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
रामकृष्ण हेगड़े, जिन्होंने 1983 से 1990 तक तीन कार्यकाल में कर्नाटक की मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की, अपने विकेंद्रीकरण, ग्रामीण विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधारों के लिए जाने जाते हैं। उनका नाम कॉलेज पर रखने से उनका योगदान सम्मानित होगा और भविष्य के चिकित्सकों को प्रेरणा मिलेगी।
राज्य अधिकारियों ने बताया कि नाम परिवर्तन में संकेतक, आधिकारिक दस्तावेज़ और कॉलेज की डिजिटल उपस्थिति को अद्यतन करना शामिल होगा। अब तक कोई विरोध या विवाद नहीं देखा गया है और यह कदम स्थानीय नेताओं व पूर्व छात्रों द्वारा सराहा गया है।