Agriculture
कागजों में समृद्ध किसान, खेत में वही पुराना संघर्ष!
किसान की उपज को मिले बाजार, ब्रांड और बेहतर मूल्य
लखनऊ। किसान कल्याण के लिए लगातार योजनाएं संचालित हो रही हैं और देश में 10 हजार एफपीओ गठित किए जा चुके हैं। करीब 65 लाख किसान इनसे शेयरधारक के रूप में जुड़े हैं और एफपीओ के जरिए हजारों करोड़ रुपये के कारोबार की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद किसानों की आय और उपज के उचित मूल्य को लेकर सवाल कायम हैं। तेजस्वी संगठन न्यास के संस्थापक ई प्रकाश पाण्डेय ने कहा कि एफपीओ का पंजीकरण ही सफलता नहीं है। असली सफलता तब होगी, जब किसान की उपज का संग्रह, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग कर उसे सीधे बाजार व उपभोक्ता तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल शेयरधारक नहीं, बल्कि व्यवसाय का सहभागी और निर्णयकर्ता बनाना होगा। ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को भी कृषि प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और उद्यमिता से जोड़ने की जरूरत है। ई प्रकाश पाण्डेय ने कहा कि अब विकास को बैठकों और प्रशिक्षणों की संख्या से नहीं, बल्कि किसान की बिक्री, बाजार पहुंच और वास्तविक आय में बढ़ोतरी से मापा जाना चाहिए। उन्होंने “तेजस्वी किसान मार्ट” जैसे मॉडल के जरिए किसान से उपभोक्ता तक सीधी बाजार श्रृंखला विकसित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा—“अब फोटो रिपोर्ट नहीं, फसल रिपोर्ट चाहिए। फाइल से खेत की ओर बढ़ना होगा।”
उन्होंने कहा—“अब फोटो रिपोर्ट नहीं, फसल रिपोर्ट चाहिए। फाइल से खेत की ओर बढ़ना होगा।”