🔥 ट्रेंडिंग बच्चों ने रावण दहन के कार्यक्रम का सफल... Dakshina Kannada, Udupi Districts Gear... Karnataka Youth Scientists Honored wit... आईएएफ के प्रमुख एपी सिंह ने पहली प्रशि... Bangalore Metro Enhances Digital Card... अदिति भंडारकर ने डीपी वर्ल्ड पीजीटी क्...
22 अक्टू. 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
कागजों में राहत, धरातल पर आफत: अथमलगोला में बाढ़ से हाहाकार, मदद को तरस रहे आठ हजार लोग

कागजों में राहत, धरातल पर आफत: अथमलगोला में बाढ़ से हाहाकार, मदद को तरस रहे आठ हजार लोग

✍️ रिपोर्टर: Lalan Kumar 🗓 04 सित. 2026, 02:56 PM 👁 225
यहाँ देखें: ▶️ YouTube
शेयर करें: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

अथमलगोला प्रशासन राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चलाने में जुटी है l अंचलाधिकारी अशोक कुमार ने भी आश्वासन दिया है कि प्रत्येक पीड़ित परिवार तक राहत पहुंचेगी l

गंगा नदी के जलस्तर में हुई अचानक वृद्धि ने पटना जिले के अथमलगोला अंचल में भयंकर तबाही मचाई है। तटीय इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से लगभग आठ हजार की आबादी गंभीर संकट में है। हज़ारों लोग अपने परिजनों और मवेशियों की जान बचाने के लिए सबनीमा पुल, स्थानीय स्कूलों और बाजारों में शरण लेने को मजबूर हो चुके हैं।
​एक तरफ प्रशासन राहत और बचाव कार्य का ढोल पीट रहा है, तो दूसरी तरफ धरातल पर हकीकत बेहद खौफनाक है। प्रशासनिक दावे केवल मुख्य सड़कों के किनारे तंबू लगाकर बैठे लोगों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। दूर-दराज़ के वार्डों विशेषकर वार्ड संख्या 8, 9 और 10 में स्थिति बेहद भयावह है, जहाँ सैकड़ों परिवार अपने जलमग्न घरों में कैद हैं। इन अंदरूनी हिस्सों तक न तो कोई प्रशासनिक नाव पहुँची है और न ही खाद्य सामग्री।
हालांकि अनुमंडलाधिकारी कृष्णा जोशी के नेतृत्व में
अथमलगोला प्रशासन राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चलाने में जुटी है l अंचलाधिकारी अशोक कुमार ने भी आश्वासन दिया है कि प्रत्येक पीड़ित परिवार तक राहत पहुंचेगी l
​स्थानीय निवासियों में शासन के इस रवैये को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन केवल सड़क किनारे फोटो खिंचवाकर वाहवाही लूटने में व्यस्त है। पीड़ित दिनेश कुमार के अनुसार, घरों में कैद लोगों के पास खाने को कुछ नहीं बचा है। प्रशासन को तुरंत सूखा अनाज, पीने का पानी और त्रिपाल बाँटने की व्यवस्था करनी चाहिए।
​इंसानों के साथ-साथ बेजुबान मवेशियों के सामने भी भूखों मरने की नौबत आ गई है। चारा पूरी तरह डूब चुका है और पशु चिकित्सा सुविधा का नामोनिशान नहीं है। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी राहत केवल मुख्य सड़कों तक सिमटकर रह जाएगी? अगर समय रहते जलमग्न इलाकों में फंसे लोगों तक सूखा राशन, दवाइियाँ और मवेशियों के लिए चारा नहीं पहुँचाया गया, तो अथमलगोला में यह प्राकृतिक आपदा एक बहुत बड़े मानवीय संकट का रूप ले लेगी।
📲Get App