📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Post of India
राजनीति
जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने नियमित एडवोकेट जनरल पद के लिए पीआईएल पर उत्तर मांगा
✍️ Daily Excelsior
🗓 14 सित. 2026, 09:31 PM
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जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नियमित एडवोकेट जनरल पद की मांग करने वाले सार्वजनिक हित याचिका पर उत्तर देने का निर्देश दिया, दैनिक एक्सेलसियर ने बताया।
जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने एक सार्वजनिक हित याचिका (पीआईएल) के जवाब में राज्य सरकार को नियमित एडवोकेट जनरल की नियुक्ति के संबंध में अपना उत्तर देने का निर्देश दिया है। दैनिक एक्सेलसियर ने इस आदेश की रिपोर्ट की, जिसमें कोर्ट ने निर्धारित समय सीमा के भीतर उत्तर देने की आवश्यकता पर बल दिया है।
याचिकाकर्ताओं का मानना है कि एडवोकेट जनरल, जो सरकार के मुख्य कानूनी सलाहकार होते हैं, को अस्थायी या अर्ध-स्थायी पद के बजाय नियमित रूप से नियुक्त किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि स्थायी नियुक्ति से कानूनी प्रतिनिधित्व में स्थिरता और निरंतरता बनी रहेगी।
कोर्ट ने सरकार को उत्तर दाखिल करने की अंतिम तिथि निर्धारित की है और उत्तर प्राप्त होने के बाद आगे की सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध किया जाएगा। याचिका में शामिल पक्षों या प्रस्तुत तर्कों के बारे में अभी तक कोई अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि एडवोकेट जनरल का पद संवैधानिक और वैधानिक मामलों में सरकार को सलाह देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और कोर्ट का यह निर्देश मौजूदा नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा को प्रेरित कर सकता है।
वर्तमान में हाई कोर्ट सरकार के उत्तर की प्रतीक्षा कर रहा है, जिसके बाद याचिका के मूल मुद्दों पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।
याचिकाकर्ताओं का मानना है कि एडवोकेट जनरल, जो सरकार के मुख्य कानूनी सलाहकार होते हैं, को अस्थायी या अर्ध-स्थायी पद के बजाय नियमित रूप से नियुक्त किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि स्थायी नियुक्ति से कानूनी प्रतिनिधित्व में स्थिरता और निरंतरता बनी रहेगी।
कोर्ट ने सरकार को उत्तर दाखिल करने की अंतिम तिथि निर्धारित की है और उत्तर प्राप्त होने के बाद आगे की सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध किया जाएगा। याचिका में शामिल पक्षों या प्रस्तुत तर्कों के बारे में अभी तक कोई अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि एडवोकेट जनरल का पद संवैधानिक और वैधानिक मामलों में सरकार को सलाह देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और कोर्ट का यह निर्देश मौजूदा नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा को प्रेरित कर सकता है।
वर्तमान में हाई कोर्ट सरकार के उत्तर की प्रतीक्षा कर रहा है, जिसके बाद याचिका के मूल मुद्दों पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।