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जयनगर के स्वर्गीय पंडित कुशेश्वर झा: गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी की संघर्षगाथा
बिहार के अररिया जिले के जयनगर गांव के पंडित कुशेश्वर झा ने 1899 में जन्म लेकर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई, नौ बार जेल में रहे और 1972 में ताम्रपत्र तथा पेंशन प्राप्त की।
15 अगस्त 1899 को बिहार के अररिया जिले के जयनगर गांव में पंडित कुशेश्वर झा का जन्म हुआ। बचपन से ही उन्होंने देशभक्ति की भावना विकसित की और पढ़ाई छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी शुरू की।
भारत छोड़ो आंदोलन और अगस्त क्रांति के दौरान उन्होंने युवाओं को संगठित कर अंग्रेजी शासन के खिलाफ जागरूकता फैलाई। इसके कारण उन्हें नौ बार जेल जाना पड़ा, जहाँ उन्होंने कठिन परिस्थितियों और यातनाओं का सामना किया।
परिवार के पास उनके जीवन से जुड़े ताम्रपत्र, पेंशन भुगतान आदेश, समाचार पत्र कतरनें और तस्वीरें हैं। 1972 में स्वतंत्रता सेनानी पेंशन योजना के तहत उन्हें ताम्रपत्र और खादी वस्त्र प्रदान किए गए।
स्वर्गीय पंडित कुशेश्वर झा का निधन 5 जुलाई 1983 को हुआ, परन्तु उनकी सेवा भावना और देशभक्ति आज भी जीवित है। नई पीढ़ी के कन्हैया कुमार झा द्वारा पुस्तक तैयार की जा रही है तथा दस्तावेजों के सत्यापन हेतु इतिहासकारों के सहयोग की अपील की गई है।
भारत छोड़ो आंदोलन और अगस्त क्रांति के दौरान उन्होंने युवाओं को संगठित कर अंग्रेजी शासन के खिलाफ जागरूकता फैलाई। इसके कारण उन्हें नौ बार जेल जाना पड़ा, जहाँ उन्होंने कठिन परिस्थितियों और यातनाओं का सामना किया।
परिवार के पास उनके जीवन से जुड़े ताम्रपत्र, पेंशन भुगतान आदेश, समाचार पत्र कतरनें और तस्वीरें हैं। 1972 में स्वतंत्रता सेनानी पेंशन योजना के तहत उन्हें ताम्रपत्र और खादी वस्त्र प्रदान किए गए।
स्वर्गीय पंडित कुशेश्वर झा का निधन 5 जुलाई 1983 को हुआ, परन्तु उनकी सेवा भावना और देशभक्ति आज भी जीवित है। नई पीढ़ी के कन्हैया कुमार झा द्वारा पुस्तक तैयार की जा रही है तथा दस्तावेजों के सत्यापन हेतु इतिहासकारों के सहयोग की अपील की गई है।