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04 नव. 2026•
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जनसंघ काल के पूर्व विधायक स्व. अनिरुद्ध पातर की 28वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित

✍️ रिपोर्टर: Mukesh Kumar Gupta 🗓 04 नव. 2026, 09:55 PM 👁 37
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महेंद्रनाथ शाहदेव ने कहा – स्व. पातर का सादगीपूर्ण जीवन और जनसेवा आज के जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत

तमाड जनसंघ काल के वरिष्ठ नेता एवं तमाड़ के पूर्व विधायक स्वर्गीय अनिरुद्ध पातर की 28वीं पुण्यतिथि बुधवार को तमाड़ प्रखंड के रायडीह गांव में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर रायडीह निवासी विमल पातर के आवास पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न राजनीतिक विचारधारा से जुड़े लोगों ने उपस्थित होकर स्वर्गीय अनिरुद्ध पातर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम का शुभारंभ राजा महेंद्रनाथ शाहदेव ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय अनिरुद्ध पातर के चित्र पर अगरबत्ती जलाकर एवं पुष्पमाला अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। सभी ने उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और समाज के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।इस मौके पर राजा महेंद्रनाथ शाहदेव ने कहा कि स्वर्गीय अनिरुद्ध पातर का संपूर्ण जीवन जनसेवा, सादगी और समर्पण का अद्भुत उदाहरण रहा है। उनकी 28वीं पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय पातर आदिवासी समाज के ऐसे जनप्रतिनिधि थे, जिनके जीवन और कार्यशैली से आज के विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों को भी सीख लेने की जरूरत है।उन्होंने स्वर्गीय पातर के कार्य करने के तरीके को याद करते हुए कहा कि वे हमेशा अपने पॉकेट में मुहर और जरूरी कागजात लेकर चलते थे। जब भी कोई जरूरतमंद व्यक्ति उनसे किसी काम के लिए मिलता था, तो वे तत्काल उसकी समस्या का समाधान करने का प्रयास करते थे। जनता के काम को प्राथमिकता देना और लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को सुनना उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी। वे पद को प्रतिष्ठा का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की सेवा का दायित्व मानते थे।
महेंद्रनाथ शाहदेव ने कहा कि आज के दौर में राजनीति में जनसेवा, ईमानदारी और जनता के प्रति जवाबदेही की चर्चा होती है, लेकिन स्वर्गीय अनिरुद्ध पातर ने अपने व्यवहार और कार्यशैली से इन मूल्यों को धरातल पर उतारकर दिखाया था। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि एक जनप्रतिनिधि की असली पहचान उसके पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि जनता के प्रति उसके समर्पण और किए गए कार्यों से होती है।उन्होंने स्वर्गीय पातर के राजनीतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1969 में वे जनसंघ के झारखंड क्षेत्र के इकलौते विधायक के रूप में निर्वाचित हुए थे। इसके बाद वर्ष 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर भी चुनाव जीतकर विधायक बने। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने क्षेत्र की जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझने और समाधान करने का प्रयास किया। उनके योगदान और जनसेवा की भावना को क्षेत्र के लोग आज भी सम्मान के साथ याद करते हैंश्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय अनिरुद्ध पातर जैसे जननेताओं का जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके विचार, सादगी, कार्यशैली और समाज के प्रति समर्पण को याद रखना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। ऐसे महापुरुषों के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता है, ताकि समाज सेवा और जनहित की भावना मजबूत हो सके।कार्यक्रम में गोलक दास अधिकारी, देवनंदन सिंह मुंडा, कन्हाई पातर, लक्ष्मण सिंह मुंडा, महेश सिंह मुंडा, सिक्किम सिंह मुंडा, सुखलाल महतो, हरिराम महतो, महावीर सोनी, विवेक गुप्ता, चंदन गुप्ता, समरेंद्र मुखर्जी, मृत्युंजय पातर, सुभाष मुंडा, सीता देवी, भारती कुमारी, आनंद प्रामाणिक सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित ।
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