📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yann (talk)
बिज़नेस
भारत के जनरेशन Z ने क्रेडिट अपनाया, भुगतान में कठिनाइयों का सामना
✍️ Business Standard
🗓 21 अग. 2026, 07:33 AM
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बिज़नेस स्टैंडर्ड की डाटानॉमिक्स रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय जनरेशन Z क्रेडिट का उपयोग बढ़ा रहा है, पर भुगतान में कई कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा प्रकाशित डाटानॉमिक्स विश्लेषण में यह बताया गया है कि भारत के जनरेशन Z में क्रेडिट लेने की प्रवृत्ति तेज़ी से बढ़ रही है। डिजिटल लेंडर, क्रेडिट‑कार्ड जारीकर्ता और पीयर‑टू‑पीयर प्लेटफ़ॉर्म के उपयोग डेटा से स्पष्ट है कि युवा अब पहले की पीढ़ियों की तुलना में ऋण लेना अधिक सहज मानते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल‑फ़र्स्ट लेंडिंग ऐप्स, आसान क्रेडिट‑कार्ड ऑनबोर्डिंग और प्रथम‑बार उधारकर्ताओं को लक्षित करने वाली विज्ञापन अभियानों ने इस वृद्धि को तेज़ किया है। कई जनरेशन Z उपयोगकर्ता सुविधा, तुरंत स्वीकृति और नकदी प्रवाह को पूरित करने की क्षमता को क्रेडिट अपनाने के मुख्य कारण बताते हैं।
परंतु वही डेटा यह भी उजागर करता है कि इन उधारकर्ताओं में से एक बड़ी संख्या भुगतान में पीछे रह रही है। अनियमित आय, सीमित वित्तीय साक्षरता और आसान क्रेडिट की लुभावनी पेशकशें देर से भुगतान और बढ़ती डिफ़ॉल्ट दरों के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उधार लेने की बढ़ती प्रवृत्ति और भुगतान क्षमता के बीच असंतुलन वित्तीय संस्थानों को कड़े उधार मानदंड अपनाने पर मजबूर कर सकता है। साथ ही, नीति निर्माताओं से युवा उपभोक्ताओं को ऋण प्रबंधन में सक्षम बनाने के लिए वित्तीय शिक्षा पहल को सुदृढ़ करने का आग्रह किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल‑फ़र्स्ट लेंडिंग ऐप्स, आसान क्रेडिट‑कार्ड ऑनबोर्डिंग और प्रथम‑बार उधारकर्ताओं को लक्षित करने वाली विज्ञापन अभियानों ने इस वृद्धि को तेज़ किया है। कई जनरेशन Z उपयोगकर्ता सुविधा, तुरंत स्वीकृति और नकदी प्रवाह को पूरित करने की क्षमता को क्रेडिट अपनाने के मुख्य कारण बताते हैं।
परंतु वही डेटा यह भी उजागर करता है कि इन उधारकर्ताओं में से एक बड़ी संख्या भुगतान में पीछे रह रही है। अनियमित आय, सीमित वित्तीय साक्षरता और आसान क्रेडिट की लुभावनी पेशकशें देर से भुगतान और बढ़ती डिफ़ॉल्ट दरों के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उधार लेने की बढ़ती प्रवृत्ति और भुगतान क्षमता के बीच असंतुलन वित्तीय संस्थानों को कड़े उधार मानदंड अपनाने पर मजबूर कर सकता है। साथ ही, नीति निर्माताओं से युवा उपभोक्ताओं को ऋण प्रबंधन में सक्षम बनाने के लिए वित्तीय शिक्षा पहल को सुदृढ़ करने का आग्रह किया गया है।