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29 जुल. 2026
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जनरेशन ज़ेड को जीतने में भारतीय राजनीतिक दलों की संघर्ष, सीजेपी विरोध के बाद
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pelph Hoters
राजनीति

जनरेशन ज़ेड को जीतने में भारतीय राजनीतिक दलों की संघर्ष, सीजेपी विरोध के बाद

✍️ NDTV 🗓 29 जुल. 2026, 05:41 PM 👁 4

राजनीतिक दलों को जनरेशन ज़ेड से जुड़ने में कठिनाई हो रही है, सीजेपी विरोध के बाद भी सहानुभूति मिलने के बावजूद। विश्लेषकों का कहना है कि दल युवाओं के साथ एक 'सिट्यूएशनशिप' में फंसे हुए हैं।

हालिया सीजेपी विरोध के बाद सार्वजनिक सहानुभूति बढ़ी, परंतु कई राजनीतिक दलों को जनरेशन ज़ेड से जुड़ने में कठिनाई हो रही है। विरोध ने न्यायिक स्वतंत्रता के मुद्दों को उजागर किया, पर युवाओं की अपेक्षाएँ अलग हैं।

युवा मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए दलों ने सोशल मीडिया अभियान, इन्फ्लुएंसर साझेदारी और "bet" व "no cap" जैसे आधुनिक स्लैंग का प्रयोग किया। पर ये प्रयास अक्सर नकली लगते हैं, जिससे आलोचकों ने इसे एक सतही "सिट्यूएशनशिप" कहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल संस्कृति का तेज परिवर्तन, प्रामाणिकता की माँग और रोजगार, जलवायु परिवर्तन व डिजिटल गोपनीयता जैसे मुद्दों पर स्पष्ट नीति की आवश्यकता है। स्पष्ट रणनीति के बिना, दलों को अनभिज्ञ माना जा सकता है।

भारतीय राजनीति के लिए चुनौती स्पष्ट है—ऐसा संदेश तैयार करना जो जनरेशन ज़ेड से जुड़ सके और मूल्यों से समझौता न करे। जब तक दल सतही तरीकों से आगे नहीं बढ़ते, युवाओं का असंतोष बना रहेगा।
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