📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Unknown authorUnknown author
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इंडिया टुडे ने 1997 के आर्काइव में 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रीय गीत के रूप में पुनः प्रस्तुत किया
✍️ India Today
🗓 21 अग. 2026, 06:17 AM
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इंडिया टुडे के 1997 के लेख 'वंदे मातरम्: एक गीत भारत के लिये' में इस राष्ट्रीय गान की महत्ता और देशभक्ति पर प्रकाश डाला गया है।
इंडिया टुडे के 1997 के आर्काइव लेख ‘वंदे मातरम्: एक गीत भारत के लिये’ में इस राष्ट्रभक्तिपूर्ण गीत की ऐतिहासिक यात्रा को फिर से उजागर किया गया है। लेख में बताया गया है कि यह गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास से उत्पन्न हुआ और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा एकजुटता का प्रतीक बन गया।
लेख यह रेखांकित करता है कि वंदे मातरम् ने साहित्यिक उत्पत्ति से परे जाकर सार्वजनिक सभाओं, स्कूलों और सरकारी समारोहों में गाया जाने वाला राष्ट्रीय गान बन गया। इसकी मातृभूमि की प्रशंसा करने वाली पंक्तियों ने विविध जनसमुदाय में स्वतंत्रता की भावना को जागृत किया।
1997 के इस पुनरावलोकन में इंडिया टुडे ने यह दर्शाया है कि आज भी यह गीत राष्ट्रीय गर्व का स्रोत बना हुआ है और विभिन्न सांस्कृतिक व राजनीतिक कार्यक्रमों में इसका प्रयोग जारी है।
लेख यह रेखांकित करता है कि वंदे मातरम् ने साहित्यिक उत्पत्ति से परे जाकर सार्वजनिक सभाओं, स्कूलों और सरकारी समारोहों में गाया जाने वाला राष्ट्रीय गान बन गया। इसकी मातृभूमि की प्रशंसा करने वाली पंक्तियों ने विविध जनसमुदाय में स्वतंत्रता की भावना को जागृत किया।
1997 के इस पुनरावलोकन में इंडिया टुडे ने यह दर्शाया है कि आज भी यह गीत राष्ट्रीय गर्व का स्रोत बना हुआ है और विभिन्न सांस्कृतिक व राजनीतिक कार्यक्रमों में इसका प्रयोग जारी है।