📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Iitj123
टेक्नोलॉजी
आईआईटी जोधपुर ने एआई से छह प्राचीन पांडुलिपियों को पढ़ने योग्य बनाया
✍️ Amar Ujala · Jodhpur
🗓 04 नव. 2026, 10:15 AM
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आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ताओं ने एआई‑आधारित तकनीक से छह प्राचीन पांडुलिपियों को संरक्षित कर पढ़ने योग्य बनाया।
आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिक एआई‑टूल्स का उपयोग करके भारत की प्राचीन पांडुलिपियों को संरक्षित कर उन्हें पढ़ने योग्य बना रहे हैं। इस परियोजना में छह ऐतिहासिक लिपियों को डिजिटल रूप में पुनर्स्थापित किया जा रहा है, जो समय के साथ धुंधली और क्षतिग्रस्त हो गई थीं।
शोधकर्ता एक डीप‑लर्निंग मॉडल विकसित कर चुके हैं जो फीके हुए स्याही को उभारता है, खोए हुए अक्षरों को पुनर्निर्मित करता है और सामग्री को आधुनिक लिपियों में परिवर्तित करता है। ज्ञात अक्षरों के डेटासेट पर मॉडल को प्रशिक्षित करके, एआई खोए हुए भागों का अनुमान लगा सकता है।
इन छह पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक डिजिटलकरण न केवल सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा करेगा, बल्कि इसे विश्वभर के विद्वानों के लिए सुलभ बनाएगा। भविष्य में इस तकनीक को बड़े संग्रहों पर लागू करने की योजना है, जिससे भारत में पांडुलिपि संरक्षण के लिए एक स्केलेबल समाधान तैयार हो सके।
शोधकर्ता एक डीप‑लर्निंग मॉडल विकसित कर चुके हैं जो फीके हुए स्याही को उभारता है, खोए हुए अक्षरों को पुनर्निर्मित करता है और सामग्री को आधुनिक लिपियों में परिवर्तित करता है। ज्ञात अक्षरों के डेटासेट पर मॉडल को प्रशिक्षित करके, एआई खोए हुए भागों का अनुमान लगा सकता है।
इन छह पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक डिजिटलकरण न केवल सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा करेगा, बल्कि इसे विश्वभर के विद्वानों के लिए सुलभ बनाएगा। भविष्य में इस तकनीक को बड़े संग्रहों पर लागू करने की योजना है, जिससे भारत में पांडुलिपि संरक्षण के लिए एक स्केलेबल समाधान तैयार हो सके।