📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vyacheslav Argenberg
विज्ञान
हिमालयी ग्लेशियल झीलों का विस्तार, बाढ़ जोखिम बढ़ा
✍️ Frontline Magazine
🗓 02 सित. 2026, 12:46 PM
👁 5
हालिया अध्ययनों से पता चला है कि हिमालय में ग्लेशियल झीलों का आकार बढ़ रहा है, जिससे नीचे बसे क्षेत्रों में बाढ़ के खतरे में इज़ाफ़ा हो रहा है।
सैटेलाइट‑आधारित सर्वेक्षणों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में हिमालयी ग्लेशियल झीलों की संख्या और सतह क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि क्षेत्रीय तापमान में वृद्धि के कारण ग्लेशियरों के तेज़ पिघलने से हो रही है।
बढ़ती झीलें ग्लेशियल लेक आउटब्रेक फ्लड (GLOF) के जोखिम को बढ़ा रही हैं, जो नीचे की घाटियों में अचानक जल और मलबे की लहरें भेज सकती हैं। गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी प्रमुख नदियों के किनारे बसे समुदाय इस खतरे के सबसे अधिक संवेदनशील हैं।
भारत, नेपाल, भूटान और चीन की प्राधिकरणें अब इन अस्थिर झीलों के निकट रिमोट‑सेंसिंग उपकरण और प्रारम्भिक चेतावनी प्रणाली स्थापित करके निगरानी को सुदृढ़ कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जोखिम मूल्यांकन और समुदाय की तैयारी भविष्य में संभावित जीवन और बुनियादी ढांचे के नुकसान को कम करने के लिए आवश्यक है।
भविष्य में बाढ़ की सटीक तीव्रता का अनुमान लगाना कठिन है, परंतु जलवायु वैज्ञानिकों की आम सहमति है कि लगातार गर्मी के कारण हिमालयी ग्लेशियल झीलों का आकार और संख्या दोनों बढ़ेगी, जिससे इस क्षेत्र में GLOF तैयारियों को दीर्घकालिक प्राथमिकता बनाना आवश्यक है।
बढ़ती झीलें ग्लेशियल लेक आउटब्रेक फ्लड (GLOF) के जोखिम को बढ़ा रही हैं, जो नीचे की घाटियों में अचानक जल और मलबे की लहरें भेज सकती हैं। गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी प्रमुख नदियों के किनारे बसे समुदाय इस खतरे के सबसे अधिक संवेदनशील हैं।
भारत, नेपाल, भूटान और चीन की प्राधिकरणें अब इन अस्थिर झीलों के निकट रिमोट‑सेंसिंग उपकरण और प्रारम्भिक चेतावनी प्रणाली स्थापित करके निगरानी को सुदृढ़ कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जोखिम मूल्यांकन और समुदाय की तैयारी भविष्य में संभावित जीवन और बुनियादी ढांचे के नुकसान को कम करने के लिए आवश्यक है।
भविष्य में बाढ़ की सटीक तीव्रता का अनुमान लगाना कठिन है, परंतु जलवायु वैज्ञानिकों की आम सहमति है कि लगातार गर्मी के कारण हिमालयी ग्लेशियल झीलों का आकार और संख्या दोनों बढ़ेगी, जिससे इस क्षेत्र में GLOF तैयारियों को दीर्घकालिक प्राथमिकता बनाना आवश्यक है।