📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Commerce and Industry (India)
देश
हरियाणा ने स्वीकृत किए 37,000 करोड़ रुपये के बॉलाघर‑पलवल मेट्रो और नामो भारत कॉरिडोर
✍️ Jagranjosh.com
🗓 11 अक्टू. 2026, 10:47 AM
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हरियाणा सरकार ने 37,000 करोड़ रुपये के ट्रांजिट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी, जिसमें बॉलाघर‑पलवल मेट्रो विस्तार और दिल्ली‑एनसीआर को जोड़ने वाला नामो भारत रैपिड‑रेल कॉरिडोर शामिल है।
हरियाणा की कैबिनेट ने 37,000 करोड़ रुपये के बड़े ट्रांजिट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। इस योजना में बॉलाघर से पलवल तक मौजूदा मेट्रो लाइन का विस्तार और “नामो भारत” नामक नई रैपिड‑रेल कॉरिडोर शामिल है, जो प्रमुख शहरों को दिल्ली से जोड़ेगा।
बॉलाघर‑पलवल सेक्शन से हजारों दैनिक यात्रियों को सुविधा मिलेगी और एनएच‑44 पर ट्रैफिक जाम कम होगा। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना को चरण‑बद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट व भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
वित्त पोषण में राज्य की बजट आवंटन, केंद्र सरकार का सहयोग और निजी‑सेक्टर की भागीदारी के तहत सार्वजनिक‑निजी साझेदारी मॉडल शामिल होगा। सरकार ने अगले साल की शुरुआत में निर्माण कार्य शुरू करने और 2027 तक पहला संचालन चरण चालू करने का लक्ष्य रखा है।
परिवहन विशेषज्ञ इस पहल को क्षेत्रीय आर्थिक विकास के उत्प्रेरक के रूप में देखते हैं, जिससे कॉरिडोर के साथ रियल‑एस्टेट गतिविधि और रोजगार सृजन में वृद्धि की उम्मीद है। यह स्वीकृति हाल के वर्षों में किसी भी भारतीय राज्य द्वारा किए गए सबसे बड़े बुनियादी ढाँचा खर्चों में से एक है।
यह परियोजना दिल्ली‑एनसीआर मास्टर प्लान के साथ भी तालमेल बिठाती है, जिसका उद्देश्य एक सहज, बहु‑मॉडल ट्रांजिट नेटवर्क बनाना है, जिससे यात्रा समय घटे और सतत शहरी विकास को बढ़ावा मिले।
बॉलाघर‑पलवल सेक्शन से हजारों दैनिक यात्रियों को सुविधा मिलेगी और एनएच‑44 पर ट्रैफिक जाम कम होगा। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना को चरण‑बद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट व भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
वित्त पोषण में राज्य की बजट आवंटन, केंद्र सरकार का सहयोग और निजी‑सेक्टर की भागीदारी के तहत सार्वजनिक‑निजी साझेदारी मॉडल शामिल होगा। सरकार ने अगले साल की शुरुआत में निर्माण कार्य शुरू करने और 2027 तक पहला संचालन चरण चालू करने का लक्ष्य रखा है।
परिवहन विशेषज्ञ इस पहल को क्षेत्रीय आर्थिक विकास के उत्प्रेरक के रूप में देखते हैं, जिससे कॉरिडोर के साथ रियल‑एस्टेट गतिविधि और रोजगार सृजन में वृद्धि की उम्मीद है। यह स्वीकृति हाल के वर्षों में किसी भी भारतीय राज्य द्वारा किए गए सबसे बड़े बुनियादी ढाँचा खर्चों में से एक है।
यह परियोजना दिल्ली‑एनसीआर मास्टर प्लान के साथ भी तालमेल बिठाती है, जिसका उद्देश्य एक सहज, बहु‑मॉडल ट्रांजिट नेटवर्क बनाना है, जिससे यात्रा समय घटे और सतत शहरी विकास को बढ़ावा मिले।