📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / President Of Ukraine
विदेश
जर्मनी ने 1.3 अरब यूरो की यूक्रेन मदद की घोषणा, फ्रीड्रिख मर्ज ने कियव में आग की स्थिति में दौरा किया
✍️ India Today
🗓 05 अक्टू. 2026, 04:01 AM
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बर्लिन ने यूक्रेन को 1.3 अरब यूरो की सहायता पैकेज की पुष्टि की, जबकि सीडीयू नेता फ्रीड्रिख मर्ज कियव पहुंचे, जहाँ शहर में तोपखाने की गोलाबारी चल रही थी।
बर्लिन के विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन के लिए 1.3 अरब यूरो मूल्य का नया सहायता पैकेज घोषित किया, जिससे कियव के पुनर्निर्माण और रक्षा जरूरतों के लिए जर्मनी की निरंतर प्रतिबद्धता स्पष्ट हुई। यह घोषणा रूस के आक्रमण के बाद यूरोपीय सुरक्षा के प्रति जर्मन समर्थन को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई।
इसी दिन, जर्मनी के क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) के नेता फ्रीड्रिख मर्ज कियव पहुंचे। मर्ज ने राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करके सहायता के कार्यान्वयन और दो देशों के बीच व्यापक सहयोग पर चर्चा की।
मर्ज की यात्रा के दौरान यूक्रेनी राजधानी के कुछ क्षेत्रों में सक्रिय गोलाबारी चल रही थी, जिससे सुरक्षा माहौल अस्थिर था। खतरे के बावजूद, प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता जारी रखी, जिससे जर्मनी की कियव के साथ आग की स्थिति में भी संवाद करने की इच्छा स्पष्ट हुई।
1.3 अरब यूरो के इस पैकेज में मानवीय सहायता और सैन्य समर्थन दोनों को शामिल किया जाएगा, हालांकि विस्तृत वितरण का विवरण अभी नहीं दिया गया है। विशेषज्ञ इस कदम को पश्चिमी देशों की यूक्रेन के प्रति समर्थन को मजबूत करने के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि संघर्ष अब दूसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
इसी दिन, जर्मनी के क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) के नेता फ्रीड्रिख मर्ज कियव पहुंचे। मर्ज ने राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करके सहायता के कार्यान्वयन और दो देशों के बीच व्यापक सहयोग पर चर्चा की।
मर्ज की यात्रा के दौरान यूक्रेनी राजधानी के कुछ क्षेत्रों में सक्रिय गोलाबारी चल रही थी, जिससे सुरक्षा माहौल अस्थिर था। खतरे के बावजूद, प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता जारी रखी, जिससे जर्मनी की कियव के साथ आग की स्थिति में भी संवाद करने की इच्छा स्पष्ट हुई।
1.3 अरब यूरो के इस पैकेज में मानवीय सहायता और सैन्य समर्थन दोनों को शामिल किया जाएगा, हालांकि विस्तृत वितरण का विवरण अभी नहीं दिया गया है। विशेषज्ञ इस कदम को पश्चिमी देशों की यूक्रेन के प्रति समर्थन को मजबूत करने के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि संघर्ष अब दूसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है।