📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Dison Antu Ritchil Marak
शिक्षा
ग़ारो समिति ने मेघालय में भाषा, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग
✍️ shillongtoday.com
🗓 20 सित. 2026, 06:32 AM
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शिलॉन्ग में ग़ारो समिति ने राज्य से ग़ारो भाषा की सुरक्षा, मातृभाषा में शिक्षा का अधिकार और संवैधानिक अधिकारों की गारंटी की मांग की है।
ग़ारो समिति ने शिलॉन्ग में बैठक करके मेघालय सरकार से ग़ारो भाषा के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। समिति ने कहा कि युवा वर्ग में भाषा के प्रयोग में गिरावट आई है और इसे स्कूल पाठ्यक्रम तथा सरकारी संचार में शामिल किया जाना चाहिए।
भाषाई मुद्दों के साथ ही समिति ने यह मांग की कि ग़ारो बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाई का अधिकार संविधान के तहत सुनिश्चित किया जाए। ऐसा करने से सांस्कृतिक निरंतरता और शैक्षणिक सफलता दोनों को लाभ होगा।
समिति ने व्यापक संवैधानिक सुरक्षा की भी माँग की, यह कहकर कि ग़ारो समुदाय को प्रभावित करने वाले किसी भी विधेयक या प्रशासनिक कार्रवाई की समीक्षा मौलिक अधिकारों के अनुपालन के लिए की जानी चाहिए। अधिकारियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब देने का अनुरोध किया गया है।
स्थानीय NGOs और शैक्षणिक संस्थानों सहित कई हितधारकों ने इन मांगों का समर्थन किया, यह उल्लेख करते हुए कि भारत के अन्य राज्यों में समान प्रावधान मौजूद हैं। समिति की अपील का परिणाम उत्तर-पूर्व में अल्पसंख्यक भाषा अधिकारों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
भाषाई मुद्दों के साथ ही समिति ने यह मांग की कि ग़ारो बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाई का अधिकार संविधान के तहत सुनिश्चित किया जाए। ऐसा करने से सांस्कृतिक निरंतरता और शैक्षणिक सफलता दोनों को लाभ होगा।
समिति ने व्यापक संवैधानिक सुरक्षा की भी माँग की, यह कहकर कि ग़ारो समुदाय को प्रभावित करने वाले किसी भी विधेयक या प्रशासनिक कार्रवाई की समीक्षा मौलिक अधिकारों के अनुपालन के लिए की जानी चाहिए। अधिकारियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब देने का अनुरोध किया गया है।
स्थानीय NGOs और शैक्षणिक संस्थानों सहित कई हितधारकों ने इन मांगों का समर्थन किया, यह उल्लेख करते हुए कि भारत के अन्य राज्यों में समान प्रावधान मौजूद हैं। समिति की अपील का परिणाम उत्तर-पूर्व में अल्पसंख्यक भाषा अधिकारों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।