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24 सित. 2026
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गोपालपुर हादसा: ग्रामीणों का फूटा गुस्सा—DFO, रेंजर और डिप्टी रेंजर पर FIR दर्ज कराने की मांग, बिड़ला माइंस और वन विभाग की खूनी सांठगांठ का पर्दाफाश!

✍️ रिपोर्टर: राजभान कुशवाहा 🗓 24 सित. 2026, 12:20 PM 👁 13
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गोपालपुर हादसा: ग्रामीणों का फूटा गुस्सा—DFO, रेंजर और डिप्टी रेंजर पर FIR दर्ज कराने की मांग, बिड़ला माइंस और वन विभाग की खूनी सांठगांठ का पर्दाफाश!
शहडोल/गोपालपुर। दक्षिण वन मंडल शहडोल अंतर्गत बुढार वन परिक्षेत्र के गोपालपुर में बिड़ला माइंस प्रोजेक्ट में पेड़ कटाई के दौरान शाहपुर निवासी गरीब मजदूर केशव प्रसाद साहू की दर्दनाक मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि हादसे के मुख्य जिम्मेदार दक्षिण मंडल अधिकारी (DFO) शहडोल, बुढार वन परिक्षेत्र अधिकारी (RO) और संबंधित डिप्टी रेंजर व बीट गार्ड के खिलाफ तत्काल गैर-इरादतन हत्या (FIR) का मुकदमा दर्ज किया जाए।
इस पूरे घटनाक्रम, प्रशासनिक सांठगांठ और कानूनी पहलुओं को उजागर करती संपूर्ण समाचार रिपोर्ट:
1. 15 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी थी अनुमति, फिर भी चलता रहा अवैध खेल
6 महीने से ओवर-टाइम कटाई: वन भूमि पर पेड़/झाड़ियों की कटाई की आधिकारिक अनुमति 15 मार्च 2026 को ही खत्म हो चुकी थी।
गैर-कानूनी गतिविधि: बिना किसी वैधानिक नवीनीकरण (Extension) के ओवर-टाइम काम कराना पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत संज्ञेय अपराध है।
2. मानसून प्रतिबंध (15 जून से 15 अक्टूबर) की खुली धज्जियां
शासकीय आदेशों का उल्लंघन: मध्य प्रदेश शासन और वन विभाग के नियमों के अनुसार प्रतिवर्ष 15 जून से 15 अक्टूबर तक मानसूनी सीजन में जंगलों में कटाई व खनन कार्य पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है।
बिड़ला खदान का दबाव: शासकीय नियमों को ताक पर रखकर बिड़ला खदान प्रबंधन के दबाव और मिलीभगत से यह जोखिम भरा काम मानसून के दौरान भी धड़ल्ले से कराया जा रहा था।
3. अधिकारियों की आपराधिक लापरवाही: न सुरक्षा उपकरण, न बीट गार्ड
सुरक्षा मानकों की हत्या: कार्यस्थल पर मजदूरों के लिए न तो सेफ्टी हेलमेट थे, न बेल्ट, न चेतावनी बोर्ड और न ही आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा।
बीट गार्ड नदारद: सुरक्षा घेरा बनवाने और निगरानी की प्राथमिक जिम्मेदारी बीट गार्ड की थी, जो मौके से गायब रहा।
डिप्टी रेंजर की शह: बुढार रेंज के डिप्टी रेंजर की देखरेख और मौन सहमति से बिना सुरक्षा मानकों के केशव प्रसाद साहू जैसे गरीब मजदूरों को मौत के कुएं में झोंका गया।
4. DFO, रेंजर और डिप्टी रेंजर पर FIR की उठी मांग (कानूनी धाराएं)
ग्रामीणों और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे मामले में वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों से लेकर मैदानी अमले पर निम्नलिखित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए:
BNS धारा 105 / 106 (गैर-इरादतन हत्या एवं लापरवाही से मौत): अधिकारियों की सीधी लापरवाही और अवैध कार्य की अनुमति देने के कारण मजदूर की जान गई, जिसके मुख्य जिम्मेदार DFO, रेंजर, डिप्टी रेंजर, बीट गार्ड और खदान ठेकेदार हैं।
भारतीय वन अधिनियम, 1927 (धारा 26 व 33): मानसूनी प्रतिबंध और अनुमति खत्म होने के बाद आरक्षित/संरक्षित वन में अवैध कार्य कराने का अपराध।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (धारा 13(1)(d)): लोक सेवकों (DFO, RO, डिप्टी रेंजर) द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर बिड़ला माइंस प्रबंधन को अनुचित लाभ पहुंचाना।
5. केशव प्रसाद के परिवार के लिए 50 लाख मुआवजा और नौकरी की मांग
हादसे के बाद वन विभाग और बिड़ला माइंस प्रबंधन एक-दूसरे पर दोष मढ़कर जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि मृतक केशव प्रसाद साहू के पीड़ित परिवार को बिड़ला माइंस प्रबंधन व शासन की ओर से 50 लाख रुपये का उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी दी जाए।
6. ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन: मुकदमे और निलंबन तक आंदोलन रहेगा जारी
शाहपुर, गोपालपुर और आसपास के ग्रामीणों ने एकजुट होकर बुढार-शहडोल मार्ग पर विरोध जताते हुए साफ कर दिया है कि जब तक:
DFO शहडोल, बुढार रेंजर, डिप्टी रेंजर और बीट गार्ड पर नामजद FIR दर्ज नहीं होती,
दोषी अफसरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित नहीं किया जाता, और
पीड़ित परिवार को हर्जाना नहीं मिलता,
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