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गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी ने वामन वृक्ष वाटिका का किया भ्रमण, बोनसाई कला को जाना
गुजरात के माननीय राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी ने एकतानगर स्थित वामन वृक्ष वाटिका का दौरा कर भारत की प्राचीन बोनसाई कला को करीब से समझा। उन्होंने स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्यों से भी मुलाकात की।
एकतानगर में स्थित खूबसूरत वामन वृक्ष वाटिका में गुजरात के माननीय राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी ने सघन भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने वाटिका के छह विभिन्न विभागों का अवलोकन करते हुए भारत की इस प्राचीन कला और समृद्ध परंपरा को निकटता से जाना।
वाटिका की गाइड कु. रेशमा घोरी जी ने राज्यपाल महोदय को वामन वृक्ष (बोनसाई) बनाने की कला के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कला मूलतः भारत की प्राचीन धरोहर है, जो यहां से चीन और तत्पश्चात जापान पहुंची, जहां इसे 'बोनसाई' नाम से प्रसिद्धि मिली। राज्यपाल ने वाटिका में संरक्षित विभिन्न पौधों तथा विशेष आकर्षण के केंद्र कृष्णकमल की अनूठी विशेषताओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।
'मेक योर ओन बोनसाई' विभाग में स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूह की श्रीमती शारदाबेन तड़वी जी ने बोनसाई निर्माण का जीवंत प्रदर्शन प्रस्तुत किया। राज्यपाल श्री देवव्रत ने उनसे पौधों के चयन, उन्हें आकार देने की पद्धति तथा उचित रख-रखाव की बारीकियों पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना भी की।
वाटिका की गाइड कु. रेशमा घोरी जी ने राज्यपाल महोदय को वामन वृक्ष (बोनसाई) बनाने की कला के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कला मूलतः भारत की प्राचीन धरोहर है, जो यहां से चीन और तत्पश्चात जापान पहुंची, जहां इसे 'बोनसाई' नाम से प्रसिद्धि मिली। राज्यपाल ने वाटिका में संरक्षित विभिन्न पौधों तथा विशेष आकर्षण के केंद्र कृष्णकमल की अनूठी विशेषताओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।
'मेक योर ओन बोनसाई' विभाग में स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूह की श्रीमती शारदाबेन तड़वी जी ने बोनसाई निर्माण का जीवंत प्रदर्शन प्रस्तुत किया। राज्यपाल श्री देवव्रत ने उनसे पौधों के चयन, उन्हें आकार देने की पद्धति तथा उचित रख-रखाव की बारीकियों पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना भी की।