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06 नव. 2026•
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गोंडपिपरी में किसानों का उग्र आंदोलन: करंजी MIDC परियोजना के लिए 10 हजार एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध गोंडपिपरी, जिला चंद्रपुर।

✍️ रिपोर्टर: Dr. PINTU PAUL 🗓 06 नव. 2026, 04:18 PM 👁 20
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गोंडपिपरी में किसानों का उग्र आंदोलन: करंजी MIDC परियोजना के लिए 10 हजार एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध गोंडपिपरी, जिला चंद्रपुर।

गोंडपिपरी में किसानों का उग्र आंदोलन: करंजी MIDC परियोजना के लिए 10 हजार एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध
गोंडपिपरी, जिला चंद्रपुर।
चंद्रपुर जिले की गोंडपिपरी तहसील में प्रस्तावित करंजी औद्योगिक क्षेत्र (MIDC) परियोजना को लेकर किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सरकार द्वारा लगभग 10,000 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण के प्रस्ताव के विरोध में 13 गांवों के किसान एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि उनकी उपजाऊ जमीन के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी करते समय उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया और न ही उनकी सहमति एवं आपत्तियों को उचित महत्व दिया गया। किसानों का कहना है कि कृषि भूमि ही उनके परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है। यदि यह जमीन औद्योगिक परियोजना के नाम पर अधिग्रहित की जाती है, तो हजारों किसान परिवारों के सामने रोजगार और भविष्य का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
किसानों का आर-पार की लड़ाई का ऐलान
शेतकरी एकता संघर्ष कृती समिति के नेतृत्व में हजारों किसानों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर करंजी MIDC परियोजना से संबंधित भूमि अधिग्रहण अधिसूचना तत्काल रद्द करने की मांग की है। किसानों द्वारा विशाल किसान सम्मेलन, विरोध प्रदर्शन तथा उपविभागीय अधिकारी (SDO) कार्यालय तक मोर्चा निकालकर प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखी गई हैं।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा। इसके तहत चक्का जाम और जेल भरो आंदोलन जैसे लोकतांत्रिक आंदोलन किए जाएंगे।
भाजपा विधायक के खिलाफ गांवबंदी
इस आंदोलन का राजनीतिक असर भी दिखाई देने लगा है। प्रभावित 12 गांवों के किसानों ने भाजपा विधायक देव राव भोंगले के खिलाफ गांवबंदी का सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया है। वहीं कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार सहित विपक्ष के नेताओं ने भी किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हुए प्रशासन और सरकार को चेतावनी दी है कि उपजाऊ कृषि भूमि छीनने का प्रयास किया गया तो व्यापक आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
सूखे की मार से परेशान किसान, ऊपर से जमीन अधिग्रहण का संकट
गोंडपिपरी तहसील के किसान पहले ही अनियमित बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण गंभीर कृषि संकट का सामना कर रहे हैं। क्षेत्र को सूखा प्रभावित घोषित किए जाने के बाद किसान अपनी सूखती फसलों को बचाने के लिए तत्काल आर्थिक सहायता और राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं।
ऐसी स्थिति में किसानों की उपजाऊ जमीन औद्योगिक परियोजना के लिए अधिग्रहित करने का प्रस्ताव उनके लिए दोहरी मार साबित हो रहा है।
सरकार से किसानों की प्रमुख मांगें
1. करंजी MIDC परियोजना के लिए जारी भूमि अधिग्रहण अधिसूचना तत्काल रद्द की जाए।
2. प्रभावित 13 गांवों के किसानों की आपत्तियों और मांगों पर सुनवाई की जाए।
3. किसानों की सहमति और वैधानिक प्रक्रिया के बिना भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई आगे न बढ़ाई जाए।
4. सूखा प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता एवं फसल नुकसान का मुआवजा दिया जाए।
5. किसानों के भविष्य, रोजगार और कृषि आधारित आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
किसानों का स्पष्ट कहना है कि विकास के नाम पर उनकी पुश्तैनी और उपजाऊ कृषि भूमि का नुकसान स्वीकार नहीं किया जाएगा। किसानों की सहमति, न्याय और उनके भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना कोई भी औद्योगिक परियोजना थोपना उचित नहीं है।
किसानों की एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। अब सरकार को तय करना है कि वह किसानों की आवाज सुनेगी या किसानों को अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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