📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Civil Aviation
राजनीति
दिल्ली से लौटे 14 मणिपुर CSOs, जनगणना स्थगन की आशा
✍️ Imphal Times
🗓 28 अग. 2026, 06:18 PM
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मणिपुर के 14 नागरिक समाज संगठनों ने दिल्ली से वापसी की, जनगणना स्थगित होने की उम्मीद जताई। यह कदम राज्य में जनसंख्या‑संबंधी मुद्दों पर सरकार को दबाव बनाने का संकेत है।
मणिपुर के 14 नागरिक समाज संगठनों (CSOs) ने दिल्ली में किए गए तथ्य‑जांच यात्रा के बाद इम्फाल लौट कर जनगणना स्थगित करने की आशा व्यक्त की। उन्होंने केंद्र के अधिकारियों से मुलाकात कर राज्य में विस्थापन, सुरक्षा और जनसंख्या परिवर्तन जैसे मुद्दों को उजागर किया।
इन संगठनों का मानना है कि मौजूदा समय‑सारिणी वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करती, जिससे सही आँकड़े नहीं मिल पाएंगे और राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है। वे चाहते हैं कि स्थगन से अधिक सटीक गणना संभव हो सके।
राज्य सरकार ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर इस वापसी से स्थानीय हितधारकों के दबाव में वृद्धि स्पष्ट होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जनगणना में बदलाव के लिए गृह मंत्रालय और मणिपुर सरकार के बीच समन्वय आवश्यक होगा, क्योंकि यह एक राष्ट्रीय प्रक्रिया है।
समूह ने दिल्ली में अपने प्रयासों को ठोस निर्णय में बदलने के लिए राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर लबिंग जारी रखने का इरादा जताया है, ताकि निर्धारित समय सीमा से पहले कोई निर्णय लिया जा सके।
यदि यह प्रयास सफल होता है, तो यह संघर्ष‑ग्रस्त क्षेत्रों के लिए जनगणना समय‑सारिणी में बदलाव का एक उदाहरण स्थापित कर सकता है।
इन संगठनों का मानना है कि मौजूदा समय‑सारिणी वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करती, जिससे सही आँकड़े नहीं मिल पाएंगे और राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है। वे चाहते हैं कि स्थगन से अधिक सटीक गणना संभव हो सके।
राज्य सरकार ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर इस वापसी से स्थानीय हितधारकों के दबाव में वृद्धि स्पष्ट होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जनगणना में बदलाव के लिए गृह मंत्रालय और मणिपुर सरकार के बीच समन्वय आवश्यक होगा, क्योंकि यह एक राष्ट्रीय प्रक्रिया है।
समूह ने दिल्ली में अपने प्रयासों को ठोस निर्णय में बदलने के लिए राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर लबिंग जारी रखने का इरादा जताया है, ताकि निर्धारित समय सीमा से पहले कोई निर्णय लिया जा सके।
यदि यह प्रयास सफल होता है, तो यह संघर्ष‑ग्रस्त क्षेत्रों के लिए जनगणना समय‑सारिणी में बदलाव का एक उदाहरण स्थापित कर सकता है।