📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
अपराध
संत चतुरदास महाराज मंदिर में 22.74 करोड़ की अनियमितता पर 11 पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 26 अग. 2026, 12:36 PM
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नागौर के बुटाटी धाम स्थित संत चतुरदास महाराज मंदिर में 22.74 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता के आरोपों पर न्यायालय के आदेश से अध्यक्ष सहित 11 पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई।
नागौर जिला न्यायालय ने बुटाटी धाम स्थित संत चतुरदास महाराज मंदिर में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को सुनते हुए पुलिस को प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने का निर्देश दिया। इस एफआईआर में मंदिर के अध्यक्ष के साथ दस अन्य पदाधिकारियों के नाम शामिल हैं।
जांच में यह बताया गया है कि इन अधिकारियों ने लगभग 22.74 करोड़ रुपये की राशि का दुरुपयोग किया है। आरोप है कि दान, मंदिर की आय और अन्य निधियों के संग्रह, लेखा‑जोखा और वितरण में गड़बड़ी हुई, जिससे संभवतः गबन हुआ।
एफआईआर दर्ज होने के बाद औपचारिक आपराधिक जांच शुरू हो गई है। पुलिस मंदिर के वित्तीय दस्तावेज़ों की जांच, गवाहों से पूछताछ और विवादित राशि के प्रवाह का पता लगाने की योजना बना रही है। यह मामला राजस्थान में धार्मिक संस्थानों की वित्तीय पारदर्शिता पर बढ़ते ध्यान को दर्शाता है।
यदि साक्ष्य पर्याप्त पाए जाते हैं तो आरोपियों को आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी के तहत दंडनीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। मंदिर के भक्त और स्थानीय जनता इस विकास को बारीकी से देख रहे हैं, ताकि दान की राशि के सही उपयोग को लेकर स्पष्टता मिल सके।
जांच में यह बताया गया है कि इन अधिकारियों ने लगभग 22.74 करोड़ रुपये की राशि का दुरुपयोग किया है। आरोप है कि दान, मंदिर की आय और अन्य निधियों के संग्रह, लेखा‑जोखा और वितरण में गड़बड़ी हुई, जिससे संभवतः गबन हुआ।
एफआईआर दर्ज होने के बाद औपचारिक आपराधिक जांच शुरू हो गई है। पुलिस मंदिर के वित्तीय दस्तावेज़ों की जांच, गवाहों से पूछताछ और विवादित राशि के प्रवाह का पता लगाने की योजना बना रही है। यह मामला राजस्थान में धार्मिक संस्थानों की वित्तीय पारदर्शिता पर बढ़ते ध्यान को दर्शाता है।
यदि साक्ष्य पर्याप्त पाए जाते हैं तो आरोपियों को आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी के तहत दंडनीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। मंदिर के भक्त और स्थानीय जनता इस विकास को बारीकी से देख रहे हैं, ताकि दान की राशि के सही उपयोग को लेकर स्पष्टता मिल सके।