📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / U.S. Department of State from United States
शिक्षा
2008 के बाद डूसू अध्यक्ष पद पर महिला उम्मीदवारों को नहीं मिली जीत
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 16 सित. 2026, 10:36 AM
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2008 के बाद से दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) में महिला उम्मीदवारों को अध्यक्ष पद नहीं मिला, जबकि एबीवीपी और एनएसयूआई ने समय-समय पर उन्हें टिकट दिया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ (डूसू) चुनाव कैंपस राजनीति का प्रमुख संकेतक रहे हैं, जहाँ राष्ट्रीय पार्टियों की छात्र शाखाएँ प्रमुख भूमिका निभाती हैं। अध्यक्ष पद, जो अत्यधिक प्रतिष्ठित है, ऐतिहासिक रूप से एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच बदलता रहा है।
2008 के बाद से महिला ने इस पद को नहीं संभाला है। तब से एबीवीपी और एनएसयूआई ने समय-समय पर महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है, परन्तु कोई भी जीत नहीं पाई है। विश्वविद्यालय के चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले पंद्रह वर्षों में यह पद लगातार पुरुषों के हाथों में रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि पार्टियों द्वारा महिलाओं को टिकट देना जारी है, परन्तु छात्र मतदाता की प्रवृत्ति ने इसे जीत में बदल नहीं पाया। यह लैंगिक अंतराल कैंपस नेतृत्व में महिला प्रतिनिधित्व की व्यापक चुनौतियों को उजागर करता है, जो बार-बार नामांकन के बावजूद अपरिवर्तित बना हुआ है।
2008 के बाद से महिला ने इस पद को नहीं संभाला है। तब से एबीवीपी और एनएसयूआई ने समय-समय पर महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है, परन्तु कोई भी जीत नहीं पाई है। विश्वविद्यालय के चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले पंद्रह वर्षों में यह पद लगातार पुरुषों के हाथों में रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि पार्टियों द्वारा महिलाओं को टिकट देना जारी है, परन्तु छात्र मतदाता की प्रवृत्ति ने इसे जीत में बदल नहीं पाया। यह लैंगिक अंतराल कैंपस नेतृत्व में महिला प्रतिनिधित्व की व्यापक चुनौतियों को उजागर करता है, जो बार-बार नामांकन के बावजूद अपरिवर्तित बना हुआ है।