📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / The open draft
जीवनशैली
जयपुर के आसलपुर में बनी गोमय राखी में तुलसी‑अश्वगंधा के बीज
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 28 अग. 2026, 06:36 AM
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जयपुर के आसलपुर में कारीगरों ने गोमय राखी तैयार की है, जिसमें तुलसी, अश्वगंधा और कालमेघ के बीज लगे हैं, जो त्योहार के लिए एक पर्यावरण‑मित्र विकल्प है।
जयपुर जिले के आसलपुर गांव में ग्रामीण उद्यमियों ने गोमय राखी बनाना शुरू किया है। इन राखियों को गोबर से तैयार किया जाता है और उनमें तुलसी, अश्वगंधा तथा कालमेघ के बीज एम्बेड किए जाते हैं, जिससे त्यौहार के बाद इन्हें बोकर औषधीय पौधे उगाए जा सकते हैं।
यह पहल पारंपरिक राखी संस्कृति को पर्यावरणीय जागरूकता के साथ जोड़ती है। गोबर, जो कृषि में बायो‑वेस्ट है, का उपयोग करके प्लास्टिक की जगह ली जा रही है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। बीज स्वदेशी और औषधीय गुणों से भरपूर हैं, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है।
गांव की महिलाएं इस उत्पादन में प्रशिक्षित हो रही हैं, जिससे उन्हें नई आय का स्रोत मिल रहा है और ग्रामीण रोजगार को सुदृढ़ किया जा रहा है। यह परियोजना गौ‑उत्पाद, ग्रामीण रोजगार और स्वदेशी औषधीय पौधों को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों के साथ मेल खाती है।
आगामी रक्षाबंधन से पहले स्थानीय बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर इन इको‑फ्रेंडली राखियों की बिक्री शुरू हो गई है, जो राजस्थान और देश भर में पर्यावरण‑सचेत उपभोक्ताओं को आकर्षित कर रही है।
यह पहल पारंपरिक राखी संस्कृति को पर्यावरणीय जागरूकता के साथ जोड़ती है। गोबर, जो कृषि में बायो‑वेस्ट है, का उपयोग करके प्लास्टिक की जगह ली जा रही है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। बीज स्वदेशी और औषधीय गुणों से भरपूर हैं, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है।
गांव की महिलाएं इस उत्पादन में प्रशिक्षित हो रही हैं, जिससे उन्हें नई आय का स्रोत मिल रहा है और ग्रामीण रोजगार को सुदृढ़ किया जा रहा है। यह परियोजना गौ‑उत्पाद, ग्रामीण रोजगार और स्वदेशी औषधीय पौधों को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों के साथ मेल खाती है।
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