📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Chemicals and Fertilizers
टेक्नोलॉजी
DRDO की बायो‑डाइजेस्टर तकनीक अब घरों और दफ्तरों में
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 30 अग. 2026, 06:48 PM
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DRDO की बायो‑डाइजेस्टर तकनीक, जो सियाचिन में सैनिकों के अपशिष्ट निपटान के लिए विकसित हुई थी, अब घरों और दफ्तरों में लागू की जा रही है।
DRDO ने सियाचिन ग्लेशियर में तैनात सैनिकों के मानव अपशिष्ट को संभालने के लिए बायो‑डाइजेस्टर विकसित किया। यह छोटा उपकरण कचरे को एनीरोबिक प्रक्रिया से तोड़ता है और बायोगैस उत्पन्न करता है, जिससे भोजन पकाने या हीटिंग के लिए ऊर्जा मिलती है और कचरे को नीचे लाने की जरूरत नहीं रहती।
सफल परीक्षणों के बाद, DRDO ने इस तकनीक को नागरिक उपयोग के लिए तैयार करने की घोषणा की। एजेंसी घरों और कार्यालयों में इस डाइजेस्टर को स्थापित करने की योजना बना रही है, जिससे कचरा प्रबंधन आसान होगा और साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन भी होगा।
परिचालन को राज्य सरकारों और आवास एवं शहरी मामलों मंत्रालय के सहयोग से पायलट परियोजनाओं के माध्यम से शुरू किया जाएगा, जिसके बाद व्यापक बाजार में लॉन्च होगा। कीमतों को मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए किफायती बनाने पर काम चल रहा है।
व्यापक अपनाने पर यह बायो‑डाइजेस्टर कचरा निपटान के पारंपरिक तरीकों को बदल सकता है, घरों के ऊर्जा बिल को घटा सकता है और भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य में योगदान दे सकता है, साथ ही असंक्रमित मलजल से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को भी कम कर सकता है।
सफल परीक्षणों के बाद, DRDO ने इस तकनीक को नागरिक उपयोग के लिए तैयार करने की घोषणा की। एजेंसी घरों और कार्यालयों में इस डाइजेस्टर को स्थापित करने की योजना बना रही है, जिससे कचरा प्रबंधन आसान होगा और साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन भी होगा।
परिचालन को राज्य सरकारों और आवास एवं शहरी मामलों मंत्रालय के सहयोग से पायलट परियोजनाओं के माध्यम से शुरू किया जाएगा, जिसके बाद व्यापक बाजार में लॉन्च होगा। कीमतों को मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए किफायती बनाने पर काम चल रहा है।
व्यापक अपनाने पर यह बायो‑डाइजेस्टर कचरा निपटान के पारंपरिक तरीकों को बदल सकता है, घरों के ऊर्जा बिल को घटा सकता है और भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य में योगदान दे सकता है, साथ ही असंक्रमित मलजल से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को भी कम कर सकता है।