📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Information and Broadcasting
राजनीति
डीके शिवाकुमार ने अमित शाह के साथ बैठक में तमिलनाडु‑पुडुचेरी को मेकेडाटु पर आश्वस्त किया
✍️ India Today
🗓 21 अग. 2026, 04:33 AM
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कर्नाटक के मंत्री डीके शिवाकुमार ने तमिलनाडु और पुडुचेरी के अधिकारियों को बताया कि मेकेडाटु जल परियोजना उनके हितों को नुकसान नहीं पहुँचाएगी, यह बात उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक में कही।
कर्नाटक के वरिष्ठ मंत्री डीके शिवाकुमार ने केंद्र के गृह मंत्री अमित शाह के साथ मेकेडाटु जल‑स्थानांतरण परियोजना पर चर्चा की। इस बैठक में उन्होंने तमिलनाडु और पुडुचेरी के प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि यह परियोजना उनके जल‑हक़ों को नुकसान नहीं पहुँचाएगी।
मेकेडाटु योजना, जो कावेरी नदी से बेंगलुरु तक पानी ले जाने के लिए प्रस्तावित है, को दक्षिणी पड़ोसी राज्यों से जल प्रवाह में कमी के डर से विरोध का सामना करना पड़ा है। शिवाकुमार ने इन चिंताओं को दूर करने के लिए आश्वासन दिया और अंतर‑राज्य सहयोग को बनाए रखने का इरादा जताया।
हालाँकि कोई विस्तृत तकनीकी विवरण नहीं दिया गया, लेकिन कर्नाटक मंत्री ने कहा कि राज्य संवाद के लिए तैयार है और अंतर‑राज्य जल‑वाटांटरण संबंधी किसी भी कानूनी या पंचायती आदेश का पालन करेगा।
बैठक के अंत में दोनों मंत्रियों ने संबंधित राज्यों के साथ निरंतर परामर्श जारी रखने और परियोजना को मौजूदा जल‑साझा समझौतों के अनुरूप सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की।
यह मुलाक़ात जल‑संबंधी अंतर‑राज्य परियोजनाओं की संवेदनशीलता और ऐसे विवादों में केंद्र सरकार की मध्यस्थता की भूमिका को उजागर करती है।
मेकेडाटु योजना, जो कावेरी नदी से बेंगलुरु तक पानी ले जाने के लिए प्रस्तावित है, को दक्षिणी पड़ोसी राज्यों से जल प्रवाह में कमी के डर से विरोध का सामना करना पड़ा है। शिवाकुमार ने इन चिंताओं को दूर करने के लिए आश्वासन दिया और अंतर‑राज्य सहयोग को बनाए रखने का इरादा जताया।
हालाँकि कोई विस्तृत तकनीकी विवरण नहीं दिया गया, लेकिन कर्नाटक मंत्री ने कहा कि राज्य संवाद के लिए तैयार है और अंतर‑राज्य जल‑वाटांटरण संबंधी किसी भी कानूनी या पंचायती आदेश का पालन करेगा।
बैठक के अंत में दोनों मंत्रियों ने संबंधित राज्यों के साथ निरंतर परामर्श जारी रखने और परियोजना को मौजूदा जल‑साझा समझौतों के अनुरूप सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की।
यह मुलाक़ात जल‑संबंधी अंतर‑राज्य परियोजनाओं की संवेदनशीलता और ऐसे विवादों में केंद्र सरकार की मध्यस्थता की भूमिका को उजागर करती है।