📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Surajkumar12111
धर्म
गयाजी पितृपक्ष मेले के सातवें दिन विष्णुपद मंदिर के 16 वेदी मंडप पर श्रद्धालुओं की भीड़
✍️ Amar Ujala · Gaya
🗓 01 अक्टू. 2026, 09:01 AM
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गयाजी पितृपक्ष मेले के सातवें दिन और गया श्राद्ध के छठे दिन विष्णुपद मंदिर के 16 वेदी मंडप पर पिंडदान व गजकर्ण तर्पण करने वाले श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र बन गया।
गयाजी पितृपक्ष मेले का सातवां दिन और गया श्राद्ध का छठा दिन एक साथ आया, जब श्रद्धालु बिहार के गया में स्थित विष्णुपद मंदिर परिसर में इकट्ठा हुए। यहाँ 16 वेदी वाले विशेष मंडप ने सबसे अधिक भीड़ को आकर्षित किया।
इन 16 वेदी का उद्देश्य पिंडदान और गजकर्ण तर्पण जैसे अनुष्ठान करना है, जो पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों को सम्मानित करने के मुख्य रीति‑रिवाज़ हैं। पिंडदान में पूर्वजों को चावल के गोले अर्पित किए जाते हैं और गजकर्ण तर्पण में जल अर्पित किया जाता है।
आयोजकों के अनुसार, मंदिर के पवित्र परिसर में स्थित यह मंडप पूरे दिन भरपूर श्रद्धालुओं से घिरा रहा। विभिन्न जिलों से आए परिवार अपने पूर्वजों की स्मृति में इन अनुष्ठानों को पूरा करने आए, जिससे गया के तीर्थस्थल के रूप में महत्व का पुनः प्रमाण मिला।
स्थानीय प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की, जिससे अनुष्ठान सुगमता से संपन्न हो सके। यह आयोजन भारतीय धार्मिक परंपराओं की आज भी प्रासंगिकता को दर्शाता है।
इन 16 वेदी का उद्देश्य पिंडदान और गजकर्ण तर्पण जैसे अनुष्ठान करना है, जो पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों को सम्मानित करने के मुख्य रीति‑रिवाज़ हैं। पिंडदान में पूर्वजों को चावल के गोले अर्पित किए जाते हैं और गजकर्ण तर्पण में जल अर्पित किया जाता है।
आयोजकों के अनुसार, मंदिर के पवित्र परिसर में स्थित यह मंडप पूरे दिन भरपूर श्रद्धालुओं से घिरा रहा। विभिन्न जिलों से आए परिवार अपने पूर्वजों की स्मृति में इन अनुष्ठानों को पूरा करने आए, जिससे गया के तीर्थस्थल के रूप में महत्व का पुनः प्रमाण मिला।
स्थानीय प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की, जिससे अनुष्ठान सुगमता से संपन्न हो सके। यह आयोजन भारतीय धार्मिक परंपराओं की आज भी प्रासंगिकता को दर्शाता है।