📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Fredericknoronha
मौसम
दीपावली से पहले दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी में, AQI 369
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 07 नव. 2026, 08:31 PM
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दीपावली की पूर्व संध्या पर दिल्ली का AQI 369 दर्ज हुआ, जिससे वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी में आई, और रविवार को इसे 'गंभीर' श्रेणी में बदलने की संभावना है।
दिल्ली की वायु गुणवत्ता शनिवार, दीपावली की पूर्व संध्या पर गंभीर रूप से बिगड़ गई, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 369 तक पहुँच गया, जिससे राजधानी को 'बहुत खराब' श्रेणी में वर्गीकृत किया गया। शहर में घना धुंध छा गया, जिससे प्रमुख सड़कों पर दृश्यता घट गई और स्थानीय अधिकारियों ने स्वास्थ्य संबंधी चेतावनियाँ जारी कीं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस AQI स्तर ने राष्ट्रीय मानकों के तहत सबसे अधिक खतरे वाले वर्ग को छू लिया है। अस्थमा या हृदय रोग जैसी पूर्व‑स्थिति वाले लोगों को बाहर की गतिविधियों को सीमित करने की सलाह दी गई।
मौसम विज्ञान विभाग ने रविवार के लिए भविष्यवाणी की है कि AQI 'गंभीर' श्रेणी में बदल जाएगा। अधिकारी स्थिति की कड़ी निगरानी कर रहे हैं और प्रदूषण को कम करने के लिए वाहन प्रतिबंध या निर्माण कार्यों को रोकने जैसे अतिरिक्त कदमों पर विचार कर सकते हैं, ताकि त्योहार के दौरान वायु को और खराब होने से बचाया जा सके।
धुएँ वाले आतिशबाज़ी और बढ़ते ट्रैफ़िक के कारण इस समय दिल्ली में कण पदार्थों की मात्रा आमतौर पर बढ़ जाती है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इन दोनों कारकों के संयुक्त प्रभाव से शहर की जनसंख्या के स्वास्थ्य जोखिम में वृद्धि हो सकती है।
यह स्थिति भारत की राजधानी में वायु प्रदूषण प्रबंधन की निरंतर चुनौती को उजागर करती है, विशेषकर दीपावली जैसे बड़े उत्सव के दौरान, जहाँ सांस्कृतिक प्रथाएँ और मौसमी परिस्थितियाँ पर्यावरण पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस AQI स्तर ने राष्ट्रीय मानकों के तहत सबसे अधिक खतरे वाले वर्ग को छू लिया है। अस्थमा या हृदय रोग जैसी पूर्व‑स्थिति वाले लोगों को बाहर की गतिविधियों को सीमित करने की सलाह दी गई।
मौसम विज्ञान विभाग ने रविवार के लिए भविष्यवाणी की है कि AQI 'गंभीर' श्रेणी में बदल जाएगा। अधिकारी स्थिति की कड़ी निगरानी कर रहे हैं और प्रदूषण को कम करने के लिए वाहन प्रतिबंध या निर्माण कार्यों को रोकने जैसे अतिरिक्त कदमों पर विचार कर सकते हैं, ताकि त्योहार के दौरान वायु को और खराब होने से बचाया जा सके।
धुएँ वाले आतिशबाज़ी और बढ़ते ट्रैफ़िक के कारण इस समय दिल्ली में कण पदार्थों की मात्रा आमतौर पर बढ़ जाती है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इन दोनों कारकों के संयुक्त प्रभाव से शहर की जनसंख्या के स्वास्थ्य जोखिम में वृद्धि हो सकती है।
यह स्थिति भारत की राजधानी में वायु प्रदूषण प्रबंधन की निरंतर चुनौती को उजागर करती है, विशेषकर दीपावली जैसे बड़े उत्सव के दौरान, जहाँ सांस्कृतिक प्रथाएँ और मौसमी परिस्थितियाँ पर्यावरण पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं।