डेढ़ साल से बंद पड़ी खैरथल किशनगढ़ बास शटल बस सेवा, जोखिम में यात्रियों का सफर
*डेढ़ साल से बंद पड़ी खैरथल-किशनगढ़बास शटल बस सेवा, जोखिम में यात्रियों का सफर*
खैरथल हीरालाल भूरानी
खैरथल -किशनगढ़बास मार्ग पर वर्षों से चल रही रोडवेज की शटल बस सेवा पिछले डेढ़ साल से ठप पड़ी है। तिजारा डिपो की लापरवाही ने आमजन की जिंदगी को जोखिम में डाल दिया है। रोजाना सफर करने वाले छात्र, नौकरीपेशा और ग्रामीण अब निजी टेंपो और ई-रिक्शा के भरोसे हैं। जिनमें सफर करना किसी खतरे से कम नहीं। यात्री मनोज शर्मा, वरुण कुमार, लक्ष्मीनारायण आदि ने बताया कि पहले इस रूट पर हर पन्द्रह बीस मिनट में बस मिल जाती थी। जिससे सफर आसान और सुरक्षित रहता था। लेकिन खैरथल के जिला बनने के बाद रोडवेज की शटल सेवा धीरे-धीरे बंद कर दी गई। अब हालात ये हैं कि यात्रियों को घंटों इंतजार के बाद निजी वाहनों में लटककर सफर करना पड़ रहा है। शटल बस सेवा बंद होते ही टेंपो चालकों की मनमानी शुरू हो गई। एक-एक टेंपो में दर्जन भर से ज्यादा सवारियां ठूंस दी जाती हैं। ई-रिक्शा भी क्षमता से अधिक भरे जा रहे हैं।
तिजारा डिपो प्रबंधन का कहना है कि बसों को रोज 400 किलोमीटर चलाने का लक्ष्य दिया गया है। जबकि इस रूट पर 10 चक्कर लगाने के बाद भी सिर्फ 200 किलोमीटर ही पूरे होते हैं। इसी वजह से सेवा बंद कर दी गई।
फोटो कैप्शन - खैरथल में बसों के अभाव में टेम्पो में यात्रा करते लोग।
खैरथल हीरालाल भूरानी
खैरथल -किशनगढ़बास मार्ग पर वर्षों से चल रही रोडवेज की शटल बस सेवा पिछले डेढ़ साल से ठप पड़ी है। तिजारा डिपो की लापरवाही ने आमजन की जिंदगी को जोखिम में डाल दिया है। रोजाना सफर करने वाले छात्र, नौकरीपेशा और ग्रामीण अब निजी टेंपो और ई-रिक्शा के भरोसे हैं। जिनमें सफर करना किसी खतरे से कम नहीं। यात्री मनोज शर्मा, वरुण कुमार, लक्ष्मीनारायण आदि ने बताया कि पहले इस रूट पर हर पन्द्रह बीस मिनट में बस मिल जाती थी। जिससे सफर आसान और सुरक्षित रहता था। लेकिन खैरथल के जिला बनने के बाद रोडवेज की शटल सेवा धीरे-धीरे बंद कर दी गई। अब हालात ये हैं कि यात्रियों को घंटों इंतजार के बाद निजी वाहनों में लटककर सफर करना पड़ रहा है। शटल बस सेवा बंद होते ही टेंपो चालकों की मनमानी शुरू हो गई। एक-एक टेंपो में दर्जन भर से ज्यादा सवारियां ठूंस दी जाती हैं। ई-रिक्शा भी क्षमता से अधिक भरे जा रहे हैं।
तिजारा डिपो प्रबंधन का कहना है कि बसों को रोज 400 किलोमीटर चलाने का लक्ष्य दिया गया है। जबकि इस रूट पर 10 चक्कर लगाने के बाद भी सिर्फ 200 किलोमीटर ही पूरे होते हैं। इसी वजह से सेवा बंद कर दी गई।
फोटो कैप्शन - खैरथल में बसों के अभाव में टेम्पो में यात्रा करते लोग।