📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
अपराध
लालू प्रसाद यादव की अपील पर झारखंड हाईकोर्ट में देवघर ‘चारा’ घोटाले की रोज़ाना सुनवाई शुरू
✍️ Amar Ujala · Patna
🗓 27 अक्टू. 2026, 09:31 AM
👁 17
झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार से देवघर कोषागार ‘चारा’ घोटाले पर रोज़ाना सुनवाई होगी, लाली प्रसाद यादव की अपील के बाद, जिसे सीबीआई की विशेष अदालत ने साढ़े तीन साल की सजा सुनाई थी।
झारखंड हाईकोर्ट ने देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले, जिसे ‘चारा’ घोटाला कहा जाता है, की रोज़ाना सुनवाई का आदेश दिया है। यह सुनवाई मंगलवार से शुरू होगी और लाली प्रसाद यादव द्वारा दायर अपील के बाद निर्धारित की गई है।
लाली प्रसाद यादव को सीबीआई की विशेष अदालत ने कोषागार में धन की ग़लत निकासी के आरोप में साढ़े तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी। उन्होंने इस फैसले के विरुद्ध अपील दायर की है, जिसमें सजा को कम या रद्द करने की मांग की गई है।
हाईकोर्ट की दैनिक सुनवाई का शेड्यूल प्रक्रिया को तेज़ करने के उद्देश्य से है, जिससे अभियोजन और बचाव दोनों पक्ष अपने‑अपने तर्क, साक्ष्य और प्रक्रिया संबंधी मुद्दों को शीघ्रता से प्रस्तुत कर सकें। यह कदम राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यादव बिहार की प्रमुख राजनीति में सक्रिय हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट इस मामले में प्रक्रिया की शुद्धता और सीबीआई द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की वैधता पर विशेष ध्यान देगा। सुनवाई की अवधि कई हफ़्तों तक चल सकती है, यह मुद्दों की जटिलता पर निर्भर करेगा।
यह मामला मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों की करीबी नजर में है, क्योंकि झारखंड हाईकोर्ट का कोई भी निर्णय सार्वजनिक अधिकारियों के वित्तीय दुराचार के मामलों में एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
लाली प्रसाद यादव को सीबीआई की विशेष अदालत ने कोषागार में धन की ग़लत निकासी के आरोप में साढ़े तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी। उन्होंने इस फैसले के विरुद्ध अपील दायर की है, जिसमें सजा को कम या रद्द करने की मांग की गई है।
हाईकोर्ट की दैनिक सुनवाई का शेड्यूल प्रक्रिया को तेज़ करने के उद्देश्य से है, जिससे अभियोजन और बचाव दोनों पक्ष अपने‑अपने तर्क, साक्ष्य और प्रक्रिया संबंधी मुद्दों को शीघ्रता से प्रस्तुत कर सकें। यह कदम राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यादव बिहार की प्रमुख राजनीति में सक्रिय हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट इस मामले में प्रक्रिया की शुद्धता और सीबीआई द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की वैधता पर विशेष ध्यान देगा। सुनवाई की अवधि कई हफ़्तों तक चल सकती है, यह मुद्दों की जटिलता पर निर्भर करेगा।
यह मामला मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों की करीबी नजर में है, क्योंकि झारखंड हाईकोर्ट का कोई भी निर्णय सार्वजनिक अधिकारियों के वित्तीय दुराचार के मामलों में एक मिसाल स्थापित कर सकता है।