📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / VIIRS imagery from NOAA's NOAA20 satellite
मौसम
बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफ़ान मुरासु की तीव्रता बढ़ी, आंध्र प्रदेश तट पर रेड अलर्ट
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 02 नव. 2026, 06:01 PM
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मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफ़ान मुरासु सक्रिय हो गया है, जिससे आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफ़ान मुरासु को गंभीर प्रणाली के रूप में वर्गीकृत किया है, क्योंकि इसकी तीव्रता में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। यह तूफ़ान तेज़ हवाओं और भारी वर्षा के साथ पश्चिम की ओर बढ़ रहा है।
इस स्थिति को देखते हुए, IMD ने आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों के लिए चेतावनी स्तर को रेड कर दिया है। राज्य के अधिकारियों को आपातकालीन प्रोटोकॉल सक्रिय करने, जोखिम वाले क्षेत्रों की निकासी, बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने और बचाव दलों की तैनाती करने का निर्देश दिया गया है।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि समुद्री लहरें और तेज़ हवाएं तटीय बस्तियों, मछली पकड़ने के बंदरगाहों और बिजली लाइनों को गंभीर क्षति पहुंचा सकती हैं। निवासियों से अपील की गई है कि वे घर के अंदर रहें, आपातकालीन किट तैयार रखें और स्थानीय आपदा प्रबंधन अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।
वर्तमान में खतरा मुख्यतः आंध्र प्रदेश के तट पर केंद्रित है, परन्तु तूफ़ान की दिशा संकेत देती है कि आगे चलकर पड़ोसी तटीय क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकता है। स्थिति की निरंतर निगरानी की जाएगी और जैसे ही नई जानकारी उपलब्ध होगी, अतिरिक्त सलाह जारी की जाएगी।
इस स्थिति को देखते हुए, IMD ने आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों के लिए चेतावनी स्तर को रेड कर दिया है। राज्य के अधिकारियों को आपातकालीन प्रोटोकॉल सक्रिय करने, जोखिम वाले क्षेत्रों की निकासी, बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने और बचाव दलों की तैनाती करने का निर्देश दिया गया है।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि समुद्री लहरें और तेज़ हवाएं तटीय बस्तियों, मछली पकड़ने के बंदरगाहों और बिजली लाइनों को गंभीर क्षति पहुंचा सकती हैं। निवासियों से अपील की गई है कि वे घर के अंदर रहें, आपातकालीन किट तैयार रखें और स्थानीय आपदा प्रबंधन अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।
वर्तमान में खतरा मुख्यतः आंध्र प्रदेश के तट पर केंद्रित है, परन्तु तूफ़ान की दिशा संकेत देती है कि आगे चलकर पड़ोसी तटीय क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकता है। स्थिति की निरंतर निगरानी की जाएगी और जैसे ही नई जानकारी उपलब्ध होगी, अतिरिक्त सलाह जारी की जाएगी।